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फॉर्म-7 दाखिल करने पर पंचायत प्रतिनिधि की गिरफ्तारी का आरोप, शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर साधा निशाना

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कोलकाता, 20 जनवरी (हि.स.)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत फॉर्म–7 जमा करने को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि फॉर्म–7 दाखिल करने के बाद एक निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि अमित मंडल के खिलाफ पुलिस ने गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया।

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तामलुक थाना कांड संख्या 37/26 के तहत दर्ज यह मामला न केवल एक निर्दोष नागरिक को निशाना बनाने का प्रयास है, बल्कि यह भारत निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकारों को भी चुनौती देने जैसा है।

शुभेंदु अधिकारी का आरोप है कि फॉर्म–7 दाखिल करना एसआईआर प्रक्रिया का एक वैधानिक और अनिवार्य हिस्सा है, इसके बावजूद राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित होकर अमित मंडल पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की कई गंभीर धाराएं लगाई गईं। इनमें देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने, आपराधिक साजिश, झूठी जानकारी देने, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और अफवाह फैलाने जैसी धाराएं शामिल हैं। इसके साथ ही जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 31 (झूठी घोषणा) भी लगाए जाने का दावा किया गया है।

नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई एसआईआर जैसी संवैधानिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश है और इससे आम नागरिकों तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में भय का माहौल पैदा किया जा रहा है।

शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि आयोग मूकदर्शक नहीं बना रह सकता, जब एक वैध चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने पर लोगों को पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले ने राज्य में कानून व्यवस्था, पुलिस की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय