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धुबुलिया की सभा से शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश एवं पश्चिम बंगाल की तुलना कर साधा निशाना

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धुबुलिया की सभा से शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश एवं पश्चिम बंगाल की तुलना कर साधा निशाना


नदिया, 20 जनवरी (हि. स.)। बांग्लादेश में लगातार बिगड़ते हालात और हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति की तुलना की है। मंगलवार को नदिया जिले के धुबुलिया में आयोजित एक जनसभा से उन्होंने एक साथ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार पर जोरदार निशाना साधा।

सभा के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश में गिरफ्तार वैष्णव संन्यासी चिन्मयकृष्ण दास का मुद्दा उठाते हुए मोहम्मद यूनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चिन्मयकृष्ण दास एक वर्ष से अधिक समय से बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। नवंबर 2024 में उन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की गई थी।

शुभेंदु ने कहा कि 1947 में देश विभाजन के समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, यानी आज के बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 33 प्रतिशत थी। आज वह घटकर मात्र सात प्रतिशत रह गई है। आज एक वैष्णव संन्यासी चिन्मयकृष्ण प्रभु को फांसी देने की साजिश की जा रही है। सोचिए, बांग्लादेश किस दिशा में जा रहा है।

राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जिसने 2011 में टाटा को बंगाल से भगाया, 2016 में नौकरियां बेचीं। अगर 2026 में किसी तरह फिर सत्ता में आ गई, तो इस राज्य को हिंदू-शून्य करने की कोशिश करेगी। जो कुछ यूनूस सरकार बांग्लादेश में कर रही है, वही काम यहां ममता बनर्जी की सरकार कर रही है।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हो रही परेशानियों पर भी शुभेंदु अधिकारी ने अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में कुछ सामान्य और भारतीय नागरिकों को परेशानी हो रही है और उन्हें हियरिंग नोटिस भेजे जा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार नहीं है। इसकी पूरी जिम्मेदारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार की है। बिहार में जब एसआईआर हुआ, वहां की सरकार ने पूरा सहयोग किया। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग और राज्य के सीईओ द्वारा चार महीने के लिए एक हजार डेटा एंट्री ऑपरेटर मांगे जाने के बावजूद सहयोग नहीं किया।

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार ने घुसपैठियों, रोहिंग्याओं, मृत और फर्जी मतदाताओं को बचाने के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध नहीं कराए, जिससे आज एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय