कालीघाट में मछली का भोग खाकर शुभेंदु अधिकारी ने बागेश्वर बाबा का किया बचाव, कहा- फूड चॉइस व्यक्तिगत पसंद
कोलकाता, 10 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कालीघाट स्थित काली मंदिर में मछली का भोग ग्रहण कर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मांसाहारी भोजन संबंधी बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसी संत ने अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की है। जिसे स्वीकार करना है, वह स्वीकार करेगा और जिसे नहीं करना है, वह नहीं करेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भवानीपुर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर जलाकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री कौशिकी अमावस्या के अवसर पर गुरुवार शाम कालीघाट मंदिर पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर भोग ग्रहण किया। भोग में मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव शामिल था। मुख्यमंत्री के मछली का भोग ग्रहण करने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने दुर्गापूजा के दौरान बंगालियों से मछली और मांस का सेवन नहीं करने की अपील की थी, मुख्यमंत्री ने कहा, “एक संत ने अपनी राय व्यक्त की है। जो इसे मानना चाहते हैं, वे मानेंगे और जो नहीं मानना चाहते, वे नहीं मानेंगे।”
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह सनातनी हिंदू हैं और अलग-अलग धार्मिक अवसरों पर अपनी परंपरा के अनुसार आहार ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा, “महाष्टमी के दिन जब मैं मां दुर्गा की पूजा करता हूं, तब सात्विक भोजन करता हूं। कार्तिक महीने में भी सात्विक भोजन करता हूं। वहीं मां काली को चढ़ाए जाने वाले बकरे के मांस का भी सेवन करता हूं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुवार को कालीघाट मंदिर में मां काली को जो भोग चढ़ाया गया, उसमें मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव था और उन्होंने वही भोग ग्रहण किया। कालीघाट मंदिर की धार्मिक परंपरा में देवी को मछली और मांस सहित विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। बंगाल में धार्मिक आस्था और खान-पान की परंपराएं लंबे समय से एक-दूसरे के साथ जुड़ी रही हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मांसाहारी भोजन के खिलाफ अपील के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। आलोचकों ने आरोप लगाया कि उनके बयान से बंगाली खान-पान और सांस्कृतिक परंपराओं पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने विरोध प्रदर्शन के तरीके को लेकर कड़ा रुख अपनाया।
इससे पहले गुरुवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने भवानीपुर थाने के सामने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर जलाकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने विधानसभा से ही कोलकाता पुलिस आयुक्त को संबंधित लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने देखा कि भवानीपुर में पुलिस थाने के सामने कितने लोगों ने तस्वीरें जलाईं। मैं यहां से सीपी को बता रहा हूं कि उन लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। राज्य में यह सब नहीं चलेगा।”
उल्लेखनीय है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील से असहमति जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि बाहर से आने वाला कोई भी धार्मिक व्यक्ति बंगालियों को यह निर्देश नहीं दे सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए या क्या पहनना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने अब केवल शाकाहार और मांसाहार के सवाल से आगे बढ़कर बंगाल की धार्मिक परंपरा, खान-पान और क्षेत्रीय पहचान का राजनीतिक मुद्दा भी ले लिया है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का कालीघाट पहुंचकर मछली का भोग ग्रहण करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने गुड़हल के फूलों की माला और लाल बनारसी साड़ी मां काली को अर्पित की। उन्होंने देवी के चरण धोए, अंजलि दी और शाम की आरती में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद भी वितरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मां काली से राज्य और देश के खिलाफ काम करने वाली ताकतों से लड़ने की शक्ति मांगी है। उन्होंने कहा, “मां काली मुझे राज्य से राष्ट्रविरोधी ताकतों को साफ करने की शक्ति दें।”
मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति हमेशा जीवित रहेगी और भगवा ध्वज हमेशा ऊंचा रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

