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गुप्तीपाड़ा में सदियों पुरानी 'भंडार लूट' परंपरा, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हुए शामिल

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गुप्तीपाड़ा में सदियों पुरानी 'भंडार लूट' परंपरा, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हुए शामिल


हुगली, 23 जुलाई (हि. स.)। जिले के गुप्तीपाड़ा में उल्टा रथ यात्रा से एक दिन पहले गुरुवार को 286 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक 'भंडार लूट' परंपरा पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। इस अनूठे आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता भी उपस्थित रहे।

गुप्तीपाड़ा की रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता 'भंडार लूट' की परंपरा है। मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपनी मौसी के घर जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, कई दिनों तक वापस नहीं लौटने पर देवी लक्ष्मी उन्हें लेने पहुंचती हैं, लेकिन भगवान जगन्नाथ मौसी के घर के स्वादिष्ट व्यंजनों के कारण लौटने को तैयार नहीं होते।

कहा जाता है कि इसके बाद तत्कालीन जमींदार वृंदावन चंद्र और कृष्णचंद्र ने मौसी के घर 'भंडार लूट' का आयोजन कराया, जिससे भगवान जगन्नाथ को वापस लौटना पड़ा। तभी से उल्टा रथ से पहले 'भंडार लूट' की यह परंपरा चली आ रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस ऐतिहासिक लोक परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने भी इस आयोजन को राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक बताया।

उत्सव के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन की निगरानी में पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 'भंडार लूट' केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बंगाल की लोक आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसे देखने के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु गुप्तीपाड़ा पहुंचते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय