सुवर्णरेखा नदी के कटाव पर प्रशासन सतर्क, स्थायी समाधान की उठी मांग
झाड़ग्राम, 05 जुलाई (हि. स.)। झाड़ग्राम जिले में बहने वाली सुवर्णरेखा नदी के लगातार हो रहे तट कटाव ने एक बार फिर नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्वालतोड़ क्षेत्र से लेकर गोपीबल्लभपुर-1, गोपीबल्लभपुर-2, सांकरे ननल और नयाग्राम प्रखंड के अनेक गांवों में हर वर्ष बरसात के दौरान नदी कटाव से घर, कृषि भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस वर्ष भी संभावित बाढ़ और कटाव को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
हाल ही में नयाग्राम विधानसभा क्षेत्र के विधायक तथा राज्य के कृषि राज्यमंत्री अमिय किस्कू ने सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता और अन्य अधिकारियों के साथ नयाग्राम प्रखंड की पाटीना ग्राम पंचायत के ऊपरी और निचली पाटीना क्षेत्रों का दौरा कर नदी तट की स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर शीघ्र आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार नयाग्राम प्रखंड के पाटीना, बड़ाखांकड़ी, मलम और नयाग्राम ग्राम पंचायतों के कई गांव प्रत्येक वर्ष नदी कटाव से प्रभावित होते हैं। नरसिंहपुर, यादवपुर, निमाईनगर, रामचंद्रपुर, बाईशबेटिया, खुरिया, खांदारपाड़ा, राजपहाड़ी, दामोदरपुर, बरडांगा, मुलतामनी, तालडांगरा और निचुकमलापुर जैसे क्षेत्रों में बरसात के समय नदी का कटाव गंभीर रूप ले लेता है।रविवार सुबह से जारी लगातार बारिश के बीच स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों में सुवर्णरेखा नदी के कटाव से अनेक घर, उपजाऊ कृषि भूमि, खेल मैदान तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियां नदी में समा चुकी हैं। यदि वर्षा का सिलसिला इसी तरह जारी रहा और झारखंड स्थित गालुडीह जलाशय से पानी छोड़ा गया, तो सुवर्णरेखा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ नदी का कटाव और भी भयावह रूप ले सकता है।
पूर्व में कुछ स्थानों पर स्थायी तटबंध बनाए गए थे, जबकि गोपीबल्लभपुर-दो क्षेत्र में अस्थायी रूप से लकड़ी के खंभों और बालू से भरे बोरों के सहारे कटाव रोकने का प्रयास किया गया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी समाधान के अभाव में हर वर्ष यही समस्या दोहराई जाती है।
झाड़ग्राम जिला परिषद के शिक्षा कार्याध्यक्ष सुमन साहू ने कहा कि सरकार बदलने के बावजूद क्षेत्र की मूल समस्या अब भी बनी हुई है। उन्होंने सुवर्णरेखा नदी के तटबंध निर्माण और लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
झाड़ग्राम निवासी तपन सिंह ने कहा कि यदि समय रहते मजबूत तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले वर्षों में खेती योग्य भूमि के साथ-साथ नदी किनारे बसे गांवों का अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
विधायक एवं कृषि राज्यमंत्री अमिय किस्कू ने कहा कि सुवर्णरेखा नदी के विभिन्न हिस्सों में कटाव की समस्या गंभीर है। प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया है और नदी तट कटाव रोकने के लिए शीघ्र प्रभावी कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

