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पेट्रापोल बंदरगाह पर तीन दिन बाद खत्म हुई गतिरोध की स्थिति, काम पर लौटे मजदूर

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पेट्रापोल बंदरगाह पर तीन दिन बाद खत्म हुई गतिरोध की स्थिति, काम पर लौटे मजदूर


कोलकाता, 04 नवंबर (हि. स.)। उत्तर 24 परगना जिले के पेट्रापोल भूमि बंदरगाह पर पिछले तीन दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार बुधवार को समाप्त हो गया। बातचीत के जरिए मजदूरों की समस्याओं का प्राथमिक समाधान निकाल लिया गया है। इसके बाद मजदूर फिर से काम पर लौट आए हैं। हालांकि, उन्होंने इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पेट्रापोल सीमा पर काम के बंटवारे को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी थी। हाल ही में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और राज्य के खाद्य मंत्री अशोक कीर्तनिया के करीबी श्रमिक संगठनों के नेताओं के बीच काम के बंटवारे को लेकर विवाद पैदा हो गया था।

आरोप है कि दोनों नेताओं की ओर से अलग-अलग श्रमिक संगठनों के लिए काम की सीमा निर्धारित की गई थी। इससे मजदूरों में असंतोष फैल गया और उन्होंने विवाद का समाधान होने तक काम बंद रखने का फैसला किया। इसके चलते एक नवंबर से पेट्रापोल बंदरगाह पर माल की लोडिंग और अनलोडिंग पूरी तरह बंद हो गई थी। परिणामस्वरूप बांग्लादेश से आने वाले कई मालवाहक ट्रक बंदरगाह पर फंस गए।

पेट्रापोल बंदरगाह पर जारी गतिरोध के बीच भाजपा के दो मंत्रियों के करीबी श्रमिक संगठनों के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आ गए थे। फिलहाल बातचीत के बाद स्थिति सामान्य होती दिख रही है।

शुल्क विभाग के क्लियरिंग सेक्शन के सचिव कार्तिक चक्रवर्ती के अनुसार, तीन दिनों में 180 से अधिक ट्रक फंस गए थे। मछली जैसे जल्द खराब होने वाले सामान को बचाने के लिए विशेष अनुरोध पर आठ से नौ ट्रकों को खाली कराया गया था।

इस गतिरोध का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा था। बुधवार को हुई बातचीत में प्राथमिक समाधान निकलने के बाद मजदूरों ने काम शुरू कर दिया है। हालांकि, मजदूरों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार