एसआरएफटीआई विवाद की जांच के लिए राज्य सरकार ने गठित की एसआईटी
कोलकाता, 30 सितंबर (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में हाल ही में हुई हिंसक झड़प की घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। छह सदस्यीय इस उच्च स्तरीय जांच दल का नेतृत्व कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा के प्रमुख कुणाल अग्रवाल करेंगे। राज्य सरकार ने एसआईटी को आगामी गुरुवार यानी एक अक्टूबर तक अपनी पहली जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।
राज्य के गृह विभाग द्वारा एसआईटी गठन को लेकर जारी अधिसूचना के अनुसार, इस घटना को लेकर पंचसायर थाने में दर्ज तीन प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर यह जांच की जाएगी। इस विशेष जांच दल में कुणाल अग्रवाल के अलावा कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग की डीसी (डीसीडीडी) स्पर्श नीलांगी और राज्य सीआईडी के डीएसपी स्तर के अधिकारी कौशिक घोष को भी शामिल किया गया है। इनके साथ ही कोलकाता पुलिस के तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारी सलिल रॉय, तुषारकांति घोष और हीरक दलपति भी इस टीम का अहम हिस्सा होंगे। नबान्न की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच की आवश्यकता पड़ने पर एसआईटी राज्य पुलिस या कोलकाता पुलिस से अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मियों की मांग कर सकती है।
ज्ञात हो कि पिछले रविवार सुबह एसआरएफटीआई के सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठन 'अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत' (एबीजीपी) द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया था। संगठन का दावा है कि यह बैठक संस्थान के अधिकारियों की पूर्व अनुमति से चल रही थी। हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद छात्रों के एक गुट ने परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सभागार के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने रजिस्ट्रार से जवाब मांगा कि किसी निजी संगठन को परिसर में बैठक करने की अनुमति क्यों दी गई। इसी बात को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। इस दौरान एबीजीपी के सदस्यों पर छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा, जबकि संगठन के सदस्यों ने भी छात्रों पर जवाबी हमले और मारपीट का आरोप लगाया है।
इस पूरी घटना और इसके बाद उपजे विवाद पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में हिंसा बेहद निंदनीय है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। मंत्री ने कहा कि यदि दो पक्षों के विवाद में स्वामी विवेकानंद या भारत माता की तस्वीर का अपमान किया गया है, तो यह एक भयानक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बंगाली छात्र स्वामी विवेकानंद की तस्वीर का अपमान नहीं कर सकता और शिक्षण संस्थानों में ऐसी संस्कृति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रविवार की घटना के बाद से ही छात्रों और शिक्षकों के एक बड़े वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त था, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी जांच का यह अहम फैसला लिया है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

