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भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक बना आईआईटी खड़गपुर का स्पिक मैके सम्मेलन

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भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक बना आईआईटी खड़गपुर का स्पिक मैके सम्मेलन


भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक बना आईआईटी खड़गपुर का स्पिक मैके सम्मेलन


भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक बना आईआईटी खड़गपुर का स्पिक मैके सम्मेलन


भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक बना आईआईटी खड़गपुर का स्पिक मैके सम्मेलन


खड़गपुर, 27 मई (हि. स.)। स्पिक मैके के 11वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन आईआईटी खड़गपुर परिसर भारतीय शास्त्रीय, लोक एवं आध्यात्मिक परंपराओं की जीवंत अनुभूति से सराबोर रहा। योग, ध्यान, लोकनृत्य, कबीर गायन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जोड़ने का कार्य किया।

दिन की शुरुआत प्रातः चार बजे ब्रह्ममुहूर्त में हठ योग, नाद योग और ध्यान सत्रों से हुई। स्वामी त्यागराजानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में हठ योग तथा पद्मश्री उस्ताद वसीफुद्दीन डागर द्वारा नाद योग का आयोजन किया गया। इसके साथ हार्टफुलनेस मेडिटेशन, भाई मनप्रीत सिंह के गुरबाणी पाठ और ब्रह्माकुमारी बहन मनीषा के राजयोग ध्यान सत्रों ने प्रतिभागियों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराया।

इसके बाद आयोजित श्रमदान कार्यक्रम ने सामूहिक उत्तरदायित्व और विनम्रता के मूल्यों को सुदृढ़ किया। पौष्टिक नाश्ते के उपरांत परिसर एक जीवंत गुरुकुल में परिवर्तित हो गया, जहां विद्यार्थियों ने भारतीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककला, शिल्प और योग से जुड़े 26 प्रशिक्षण सत्रों में भाग लिया।

दोपहर बाद नेताजी सभागार में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तारापदा रजक एवं उनकी मंडली ने पुरुलिया छाऊ नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति दी। देवी दुर्गा और असुरों के युद्ध को भव्य मुखौटों, युद्धक मुद्राओं और कलाबाजियों के माध्यम से मंचित किया गया। इसके बाद मयूर कला केंद्र की ओर से मयूरभंज छाऊ की प्रस्तुति दी गई, जिसमें कलाकारों ने बिना मुखौटे केवल शारीरिक अभिव्यक्तियों और नृत्य संयोजन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सायं चार बजे पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने कबीर गायन प्रस्तुत किया। पारंपरिक लोक वाद्यों की संगत में कबीर के दोहों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सौहार्द से भर दिया।

रात्रि सत्र में पद्मभूषण बेगम परवीन सुल्ताना ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया, जबकि पद्मश्री तरुण भट्टाचार्य के संतूर वादन ने कार्यक्रम को ध्यानमय वातावरण में पहुंचा दिया।

सम्मेलन के अंतर्गत पिछली संध्या में विदुषी सुजाता महापात्रा ने ओडिसी नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। वहीं पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार ने राग रागेश्री और राग पहाड़ी की प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आलाप के दौरान ध्यानमग्न देखना उनके लिए सबसे सुखद अनुभव रहा।

सम्मेलन के अगले दिन में गायन-बायन, घुस्साड़ी नृत्य, बाउल संगीत, कर्नाटक संगीत तथा कूडियाट्टम की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता