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आईआईटी खड़गपुर की पहल, सौर ऊर्जा से चलेगी मोबाइल दुकान

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आईआईटी खड़गपुर की पहल, सौर ऊर्जा से चलेगी मोबाइल दुकान


आईआईटी खड़गपुर की पहल, सौर ऊर्जा से चलेगी मोबाइल दुकान


आईआईटी खड़गपुर की पहल, सौर ऊर्जा से चलेगी मोबाइल दुकान


आईआईटी खड़गपुर की पहल, सौर ऊर्जा से चलेगी मोबाइल दुकान


खड़गपुर, 17 अक्टूबर (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए ‘नगर उद्यम’ पहल शुरू की है। इसके तहत सौर ऊर्जा से चलने वाली स्मार्ट वेंडिंग यूनिट विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जिसे मोटरसाइकिल के पीछे जोड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकेगा। कारोबार समाप्त होने के बाद इसे घर भी वापस ले जाया जा सकेगा। इससे स्थायी दुकान किराये पर लेने और सड़क किनारे स्थायी ढांचा बनाने की जरूरत कम हो सकती है।

दुर्गापूजा के अवसर पर संस्थान परिसर में इस परियोजना के पायलट मॉडल का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती, मुख्य अतिथि खड़गपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सिद्धार्थ सिंह डांगी, आईपीएस, सहित संस्थान के संकाय सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी और स्थानीय कारोबारी उपस्थित रहे। निदेशक की परिकल्पना पर आधारित इस पहल की शुरुआत महाषष्ठी के दिन टेक्नोलॉजी स्टूडेंट्स जिमखाना में की गई। यह संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष में तकनीक के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक अवसर पैदा करने के प्रयास का हिस्सा है।

तिपहिया वाहन की अवधारणा पर आधारित इस स्मार्ट कार्ट को मोटरसाइकिल से जोड़कर ले जाने की योजना है। कारोबारी ग्राहकों की मांग के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर दुकान लगा सकेंगे और काम समाप्त होने पर इसे घर ले जा सकेंगे। इसके माध्यम से लगभग 30 किलोमीटर तक आवागमन की परिकल्पना की गई है। हालांकि, वास्तविक संचालन, सड़क सुरक्षा और आवश्यक अनुमतियों का सत्यापन किया जाना बाकी है।

कार्ट में सौर ऊर्जा और कॉम्पैक्ट बैटरी की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे कम बिजली खपत करने वाले उपकरण चलाए जा सकेंगे। खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से प्रदर्शित करने, खाद्य-सुरक्षित कार्य सतह, पानी और तेल के बेहतर प्रबंधन तथा कचरे को तीन श्रेणियों में अलग करने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।

आईआईटी खड़गपुर की ‘सेतु क्लाउड किचन कनेक्ट’ व्यवस्था के माध्यम से विक्रेताओं को डिजिटल पहचान, क्यूआर कोड, नकदरहित भुगतान, प्रशिक्षण और वित्तीय समावेशन से जोड़ने की योजना है। खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी, शिकायत निवारण और आंकड़ों के आधार पर प्रशासनिक निगरानी जैसी सुविधाओं की भी परिकल्पना की गई है।

प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि उद्देश्य केवल सड़क किनारे दुकान को नया रूप देना नहीं, बल्कि कारोबारियों के अवसर बढ़ाना है। ग्राहकों की मांग के अनुसार स्थान बदलने, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जुड़ने की सुविधा छोटे विक्रेताओं को उद्यमी बनने में मदद कर सकती है।

एसडीपीओ सिद्धार्थ सिंह डांगी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था आजीविका के अवसर बढ़ाने के साथ सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने में सहायक हो सकती है। इसके लिए सुरक्षित आवागमन, जिम्मेदारीपूर्ण संचालन और स्थानीय नियमों का पालन जरूरी है।

संस्थान परिसर में इस परियोजना का परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान खाद्य सुरक्षा, संचालन, पर्यावरणीय प्रभाव, विक्रेताओं के अनुभव और ग्राहकों की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन होगा। प्राप्त अनुभवों के आधार पर भविष्य में ‘पश्चिम बंगाल स्मार्ट स्ट्रीट वेंडर फ्रेमवर्क’ विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कम लागत में व्यवसाय शुरू करने और आगे दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने का अवसर देना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता