बंगाल सरकार ने खरीदा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पैतृक घर, बनेगा संग्रहालय और पुस्तकालय
कोलकाता, 29 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के हुगली जिले के बलागढ़ स्थित जिराट गांव में बने पैतृक आवास को एक करोड़ 25 लाख 99 हजार 822 रुपये में खरीद लिया है। संपत्ति का पंजीकरण तीन जुलाई को कोलकाता स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में पूरा हुआ और उसी दिन उत्तराधिकारियों के खातों में राशि बैंक हस्तांतरण के माध्यम से भेज दी गई। इसके साथ ही यह निजी संपत्ति अब राज्य सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग के स्वामित्व में आ गई है।
राज्य मंत्रिमंडल ने इस संपत्ति को खरीदने का निर्णय तीन जून की बैठक में लिया था। इसके बाद 29 जून को हुगली के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने जिला प्रत्यक्ष भूमि खरीद समिति के साथ बैठक की। बैठक के तीन दिन के भीतर ही खरीद की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
स्थानीय विधायक तथा राज्य के स्वास्थ्य राज्यमंत्री सुमना सरकार ने गुरुवार को कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर का संरक्षण कर वहां संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने का वादा किया था। उसी दिशा में अब राज्य सरकार ने कदम बढ़ाया है।
राज्य सरकार ने इस वर्ष छह जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सरकारी कर्मचारियों के लिए अवकाश की घोषणा की थी और उनके जन्मदिवस को विशेष रूप से मनाया गया। राज्य के बजट में उनके पैतृक आवास के विकास, 125 फुट ऊंची प्रतिमा, पुराने भवन के जीर्णोद्धार और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
योजना के अनुसार परिसर में एक स्मृति पार्क, पुस्तकालय, संग्रहालय और सभागार विकसित किया जाएगा। साथ ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पूर्णाकृति प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
वर्तमान में इस संपत्ति की देखरेख डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाई बामा प्रसाद मुखर्जी के पौत्र बाणी प्रसाद मुखर्जी तथा परिवार के अन्य सदस्य कर रहे हैं। जिराट में 'बंगाल के बाघ' कहे जाने वाले आशुतोष मुखर्जी के नाम पर पहले से विद्यालय और पुस्तकालय हैं, लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर अब तक कोई बड़ा स्मारक नहीं था। अब राज्य सरकार की पहल के बाद उनके पैतृक घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

