ऊपर वाले का न्याय, तृणमूल मृत और निर्मूल, ममता का चुनाव चिह्न छिनने पर शमिक भट्टाचार्य का तंज
कोलकाता, 18 सितंबर (हि. स.)। आगामी उपचुनावों के लिए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा तंज कसा है। चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने इसे 'ऊपर वाले का न्याय' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब तृणमूल नाम की कोई पार्टी नहीं बची है, यह पूरी तरह से मृत और निर्मूल हो चुकी है।
शुक्रवार को कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी और उनके नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अतीत की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह ऊपर वाले का न्याय है। एक समय था जब उत्तर 24 परगना और बैरकपुर इलाके में तृणमूल ने यह फतवा जारी किया था कि अगर सिंदूर या आलता के पैकेट पर कमल के फूल की तस्वीर होगी, तो उसे बेचा नहीं जा सकेगा। आज उनके साथ वही हुआ है।
उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि तृणमूल का चुनाव चिह्न रहे या जाए, इससे आम जनता को अब कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट आदेश दिया था कि कालीघाट (ममता) गुट और बागी ऋतब्रत गुट में से कोई भी उपचुनाव में 'जोड़ा फूल' निशान का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। आयोग ने शुक्रवार सुबह 11 बजे तक दोनों पक्षों से नए नाम और प्रतीकों के विकल्प जमा करने को कहा था। शुरुआत में कालीघाट गुट के नेता कल्याण बनर्जी ने आयोग का यह फैसला मानने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों की मजबूरी के चलते ममता बनर्जी खेमे को अंततः ईमेल के जरिए आयोग को अपने नए नाम और प्रतीकों की सूची भेजनी पड़ी।
दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट ने भी चुनाव आयोग को अपने प्रस्तावित नामों और प्रतीकों की सूची सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ने अपनी नई पार्टी के लिए 'लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस' या 'पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस' नाम का प्रस्ताव दिया है। चुनाव चिह्न के रूप में उन्होंने लिफाफा, ब्लैकबोर्ड और टॉर्च की मांग की है। हालांकि, बंगाल की राजनीति में लिफाफा चिह्न का इस्तेमाल पहले से ही इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) करती है और टॉर्च का निशान एसयूसीआई पार्टी का है। दोनों गुटों के प्रस्तावों पर अब अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

