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'बंगाल में शासक का कानून नहीं, कानून का शासन : शमिक भट्टाचार्य

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'बंगाल में शासक का कानून नहीं, कानून का शासन : शमिक भट्टाचार्य


कोलकाता, 27 अक्टूबर (हि. स.)। उत्तर 24 परगना के गाईघाटा में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के आरोपित प्रह्लाद दास की पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बंगाल में अब 'शासक का कानून' नहीं, बल्कि 'कानून का शासन' चल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल के शासनकाल में पुलिस बल पर हुए सिलसिलेवार हमलों और राज्य की बदहाल कानून-व्यवस्था का भी प्रमुखता से जिक्र किया।

गौरतलब है कि पिछले रविवार को गाईघाटा में एक पड़ोसी के घर के पास से 17 वर्षीय नाबालिग का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था। परिजनों के आरोपों और शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रह्लाद दास को गिरफ्तार किया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, सोमवार रात आरोपित को घटना के नाट्य रूपांतरण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) के लिए ले जाया गया था। पुलिस का दावा है कि वहां से लौटते समय आरोपी ने एक अधिकारी की बंदूक छीन ली और फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से उसकी मौत हो गई।

इस पुलिसिया कार्रवाई के संदर्भ में शमिक भट्टाचार्य ने राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आखिर किन परिस्थितियों में पुलिस को गोली चलानी पड़ती है? हमारे राज्य में कितनी बार पुलिस को गोली चलानी पड़ी है? हमने वह दौर भी देखा है जब वक्फ को लेकर आंदोलन चल रहा था, तब पुलिसकर्मियों ने हाथ जोड़कर आम लोगों और दुकानदारों से शटर उठाने और जान बख्शने की गुहार लगाई थी। अगर पुलिस बल पर इसी तरह बार-बार हमले होंगे, तो उनके सामने आत्मरक्षा के अलावा क्या रास्ता बचेगा?

प्रशासन के अत्यधिक राजनीतिकरण को लेकर पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस सरकार ने दिखा दिया है कि व्यवस्था का कितना घिनौना रूप हो सकता है। उन्होंने पंचायत चुनावों में हुई कथित धांधली का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि विजयी भाजपा महिला उम्मीदवारों को रात डेढ़ बजे तक मतगणना केंद्रों पर बैठाकर रखा गया और बाद में उनके प्रमाणपत्र बदलकर उन्हें हारा हुआ घोषित कर दिया गया, जिसकी भनक खुद उम्मीदवारों को भी नहीं थी।

राज्य में पिछले डेढ़ दशक के दौरान हुई हिंसक घटनाओं का ब्योरा मांगते हुए शमिक ने कई तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि पिछले 15 वर्षों में कितने पत्रकार लहूलुहान हुए हैं? कितनों के हाथ-पैर तोड़े गए हैं? न्याय मांगने वाले कितने शिकायतकर्ता अचानक लापता हो गए, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला? राज्य में कितनी रहस्यमयी मौतें हुई हैं? अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दागदार इतिहास वाली तृणमूल कांग्रेस को कानून के शासन का पाठ पढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा