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सौगत राय ने महबूबा मुफ्ती के ‘दिमागी नक्सल’ बयान का किया समर्थन

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सौगत राय ने महबूबा मुफ्ती के ‘दिमागी नक्सल’ बयान का किया समर्थन


कोलकाता, 17 अगस्त (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का सोमवार को समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि लोकतांत्रिक देश में लोगों को अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक विचार रखने का अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की बात करता है तो इसमें आपत्ति की क्या बात है।

महबूबा मुफ्ती ने रविवार को खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को बहाल करने के उनके लगातार समर्थन के कारण वह ऐसा मानती हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

सौगत राय ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की अपनी राजनीतिक और वैचारिक सोच हो सकती है। उन्होंने कहा, “कई लोग सोचते हैं कि हमें हमेशा चिंतित रहना चाहिए। नक्सल का अर्थ ऐसे लोगों से है जो व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। यदि किसी के मन में ऐसे विचार हैं तो इसमें गलत क्या है? यह एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के अपने विचार हो सकते हैं।”

तृणमूल सांसद ने भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक विरोधियों के लिए नए-नए शब्द गढ़ने का आरोप भी लगाया। उन्होंने भाजपा के पुराने ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ संबंधी आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सामने लाया गया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा पहले ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ की बात करती थी। अब उन्होंने एक नया शब्द ‘दिमागी नक्सल’ शुरू किया है। मैं इसमें विश्वास नहीं करता। महबूबा मुफ्ती एक अच्छी नेता हैं और यदि उन्होंने ऐसा कहा है तो उन्होंने सही कहा है।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर विवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि भारत ने सशस्त्र नक्सलवाद को कमजोर करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, लेकिन नक्सली विचारधारा का एक अधिक सूक्ष्म रूप अब भी देश के लिए चुनौती बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलियों से देश ने काफी हद तक मुक्ति हासिल कर ली है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ यानी नक्सली मानसिकता रखने वाले लोग हिंसा और अशांति फैलाने के अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने तथा युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा राजनीतिक विरोधियों और अलग विचार रखने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए उकसाने वाले राजनीतिक विशेषणों का इस्तेमाल कर रही है। इसी क्रम में महबूबा मुफ्ती के बयान और सौगत राय के समर्थन ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता