पुरुलिया से पश्चिम मेदिनीपुर तक बालू घाटों पर सख्ती का असर
मेदिनीपुर, 14 मई (हि. स.)। विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भी जिले के कुछ बालू घाटों से बालू उठाने की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन राज्य नए मुख्यमंत्री बनने के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। कई जगहों पर बालू घाटों की गतिविधियां थम गई हैं और माहौल शांत दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पुरुलिया जिले में कुल 14 वैध बालू घाट हैं, जो पश्चिम बंगाल मिनरल डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया के तहत संचालित होते हैं। पहले बालू कारोबार को लेकर लंबे समय से अनियमितता और सिंडिकेट के प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सरकारी नियंत्रण के बालू की कीमतें कई गुना तक बढ़ जाती थीं और अवैध घाटों से भी बड़े पैमाने पर खनन होता था।
हाल के घटनाक्रम के बाद कई वैध घाटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही नियमित संचालन बहाल किया जाएगा।
इसी बीच, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में भी बालू घाटों की भूमिका स्थानीय अर्थव्यवस्था और निर्माण कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां शीलावती, सुवर्णरेखा और कंसाबती जैसी प्रमुख नदियों के किनारे खनन गतिविधियां संचालित होती हैं। वर्तमान में राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल खनिज विकास एवं व्यापार निगम की ओर से गड़वेता–II जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल खनन के लिए नई निविदाएं जारी की जा रही हैं, ताकि अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इन घाटों के प्रबंधन के लिए जिला भूमि एवं भूमि सुधार कार्यालय (डीएल एवं एलआरओ) और राज्य स्तरीय समितियों द्वारा कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजस्व व्यवस्था को मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

