आरएसएस से जुड़ाव के चलते युवक के साथ बदसलूकी का वीडियो वायरल
टीएमसी कार्यालय में दी गई धमकी, मंगवाई माफी
बीरभूम, 19 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के नानूर से सामने आया एक वीडियो बंगाल में राजनीतिक असहिष्णुता की पोल खोल दी है। सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दिख रहा है कि संघ के एक स्वयंसेवक पिंटू पाल को स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में खुलेआम धमकाया जा रहा है और उसे आरएसएस से नाता तोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
हालांकि हिंदुस्थान समाचार इस वीडियो के सत्यता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन फुटेज में जो दिख रहा है, वह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है। वीडियो में युवक को डर के माहौल में हाथ जोड़कर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह जीवन में कभी आरएसएस नहीं करेगा। कैमरे के पीछे से एक व्यक्ति की आवाज आती है,
“अब जिंदगी में आरएसएस करेगा?”
डरे-सहमे युवक का जवाब होता है,
“मैं जिंदगी में अब आरएसएस नहीं करूंगा।”
यहीं मामला खत्म नहीं होता। युवक को भीड़ के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए बाध्य किया जाता है। इसके बाद कैमरे के पीछे से जानलेवा धमकी दी जाती है,
“तेरी किस्मत अच्छी है कि आज छोड़ दिया। नहीं तो लोगों के हवाले कर देते, वे फाड़ कर खा जाते।”
इस पूरी घटना को लेकर गंभीर आरोप यह है कि यह सब उचकारण तृणमूल कांग्रेस के अंचल अध्यक्ष और नानूर पंचायत समिति के कृषि कर्माध्यक्ष की मौजूदगी में हुआ और उन्हीं के दबाव में युवक को आरएसएस से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया गया। वीडियो में कथित तौर पर वही नेता स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं।
इस सनसनीखेज मामले पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती का बयान भी आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमें इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं है। किसी को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि आरएसएस न करना पुण्य का काम है।”
इस वीडियो की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है और इंटरनेट पर बीरभूम जिला पुलिस पर सोशल मीडिया यूजर्स गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बहरहाल, सवाल यह है कि क्या किसी भारतीय नागरिक को अपनी विचारधारा चुनने का अधिकार भी नहीं है? क्या आरएसएस से जुड़ना अब पश्चिम बंगाल में अपराध बना दिया गया है?
विपक्ष ने इस घटना को “राजनीतिक आतंक” बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, वीडियो की फॉरेंसिक जांच और पीड़ित युवक को सुरक्षा देने की मांग की है। यह मामला केवल एक युवक का नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक अधिकार का है, जिसे भीड़ और सत्ता के संरक्षण में कुचला जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

