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मार्क्स, लेनिन और हो ची मिन्ह के नाम वाली कोलकाता की सड़कों के नाम बदलने की तैयारी, तृणमूल ने बताया बदले की राजनीति

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मार्क्स, लेनिन और हो ची मिन्ह के नाम वाली कोलकाता की सड़कों के नाम बदलने की तैयारी, तृणमूल ने बताया बदले की राजनीति


कोलकाता, 14 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय सलाहकार समिति राज्य की कई सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर विचार कर रही है। इनमें कोलकाता की लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी भी शामिल हैं। समिति की पहली बैठक दुर्गा पूजा के बाद होने की संभावना है, जिसमें कोलकाता की सड़कों के नाम बदलने के प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।

भारत सेवाश्रम संघ के कार्तिक महाराज के नाम से प्रसिद्ध स्वामी प्रदीप्तानंद की अध्यक्षता वाली समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने सोमवार को यह जानकारी दी। समिति के सदस्य और भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत राय ने कहा कि अभी किसी नाम को बदलने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। दुर्गा पूजा के बाद अक्टूबर में सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

तथागत राय ने खिदिरपुर स्थित कार्ल मार्क्स सरणी का नाम बदलकर बंगाली कवि माइकल मधुसूदन दत्त या रंगलाल बंद्योपाध्याय के नाम पर रखने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों साहित्यकारों का इस क्षेत्र से संबंध रहा है। इसी तरह उन्होंने पहले धर्मतला स्ट्रीट के नाम से जानी जाने वाली लेनिन सरणी का नाम गणितज्ञ और पूर्व भारतीय जनसंघ अध्यक्ष देबाप्रसाद घोष के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है।

राय ने कहा, ये सभी प्रस्ताव हैं, जिन्हें पूजा के बाद सिफारिश के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा और अंतिम निर्णय कोलकाता नगर निगम को लेना होगा।

एस्प्लेनेड क्रॉसिंग पर स्थित लेनिन की प्रतिमा हटाए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर राय ने कहा कि यदि इस संबंध में कोई सुझाव आता है तो उन्हें उम्मीद है कि बोर्ड उस पर विचार करेगा।

हो ची मिन्ह सरणी का नाम बदलकर अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नाम पर रखने का सुझाव भी राय ने दिया है।

राय ने कुछ ऐसे स्थानों के नाम बदलने का भी प्रस्ताव रखा है, जो मुस्लिम हस्तियों के नाम पर हैं। उन्होंने इनके स्थान पर अपने शब्दों में राष्ट्रवादी मुस्लिम व्यक्तित्वों के नाम रखने का सुझाव दिया है। इनमें लेखक काजी अब्दुल वदूद, शिक्षाविद बेगम रोकेया और लेखक एस. वाजेद अली के नाम शामिल हैं। उन्होंने बरासात में तितुमीर के नाम वाले बस स्टैंड का नाम बदलने के लिए भी इन नामों पर विचार करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि टॉलीगंज-गारिया खंड की ब्लू लाइन के कुछ मेट्रो स्टेशनों के नाम भी संबंधित क्षेत्रों के नाम पर रखे जाने चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मेट्रो रेलवे अधिकारियों को सुझाव दिया है। राय के अनुसार, इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को स्टेशनों की पहचान करने में सुविधा होगी।

पूर्व मेघालय राज्यपाल ने कोलकाता की किसी महत्वपूर्ण सड़क का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखने का भी सुझाव दिया है।

समिति में राय के अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार सुब्रत गुप्ता और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। राय ने कहा कि समिति की सिफारिशें आगे राज्य विधानसभा को भेजी जाएंगी।

नाम बदलने के प्रस्तावों पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे बदले की राजनीति करार दिया। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि उनकी पार्टी के कम्युनिस्टों के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लेनिन सरणी का नाम बदलने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

घोष ने कहा कि यदि लेनिन सरणी का नाम बदलने की कोशिश की गई तो मामला केवल लेनिन के नाम तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह संदेश जाएगा कि भाजपा अलग विचारधारा और अलग सोच रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता नहीं रखती।

उन्होंने कहा कि माकपा लेनिन सरणी का नाम बदलने का निश्चित रूप से विरोध करेगी और तृणमूल कांग्रेस भी इस कदम का विरोध करेगी। उन्होंने कहा, लेनिन सरणी थी और आगे भी रहेगी।

हालांकि, घोष ने माकपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा विवाद से वामपंथी दल को सबक लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के प्रति माकपा के अंध विरोध ने कई बार भाजपा को मजबूत किया है और केंद्रीय एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई पर वामपंथियों ने खुशी जताई है।

घोष ने कहा, यदि किसी का अपमान करने या किसी विशेष विचारधारा के प्रति अनादर जताने के उद्देश्य से सड़कों के नाम बदले जाते हैं तो इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर घोष ने कहा कि कई स्टेशनों के नाम संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों के सम्मान में रखे गए हैं और लोगों ने उन्हें स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकार, लेखक और निबंधकार बरुण सेनगुप्त के नाम पर मेट्रो स्टेशन रखे जाने का कारण सभी जानते हैं। उन्होंने कहा कि जहां किसी क्षेत्र का किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व से संबंध हो या किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के सम्मान में किसी स्थान का नाम रखना उचित हो, वहां उस नाम को बरकरार रखा जाना चाहिए। उन्होंने उत्तम कुमार का उदाहरण भी दिया।

घोष ने आरोप लगाया, हमने प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सम्मान करने की संस्कृति विकसित की थी, जबकि वे (भाजपा) इसे नष्ट करने के उद्देश्य से एक विनाशकारी और नकारात्मक माहौल तैयार कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर