बढ़ी मूर्ति निर्माण सामग्री की कीमतें, दुर्गोत्सव से पहले कुम्हारटोली के मूर्तिकारों की बढ़ी चिंता
जलपाईगुड़ी, 08 सितंबर (हि. स.)। शारदीय नवरात्र और दुर्गोत्सव की तैयारियां शुरू होने के साथ ही जलपाईगुड़ी के कुम्हारटोली के मूर्तिकारों की चिंता बढ़ गई है। प्रतिमाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लगभग सभी सामग्रियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मूर्तिकारों के सामने लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
शहर में जन्माष्टमी के बाद गणेश पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और धीरे-धीरे दुर्गापूजा की आहट भी सुनाई देने लगी है। हालांकि, मूर्तिकारों के लिए यह उत्सव का समय आर्थिक चिंता लेकर आया है। प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, पुआल, जूट, बांस, रस्सी और सजावटी सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
आसनसोल के वरिष्ठ मूर्तिकार रतन पाल के अनुसार, कारीगरों की मजदूरी में काफी वृद्धि हुई है। माटीगाड़ा, घोषपुकुर और भोटपट्टी से आने वाली मिट्टी की कीमत भी करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले जिस सुतली की कीमत करीब 140 रुपये प्रति किलो थी, वह अब बढ़कर 250 रुपये हो गई है। वहीं, 120 रुपये में मिलने वाला बांस अब करीब 150 रुपये में मिल रहा है।
मूर्तिकार रणजीत पाल ने कहा कि इस वर्ष पूजा समितियों को मिलने वाले आर्थिक अनुदान को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। अनुदान कितना मिलेगा, इसे लेकर कई पूजा आयोजक अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसका असर मूर्तियों के आभूषण और सजावट की खरीद पर भी पड़ रहा है।
वहीं, एक अन्य मूर्तिकार राकेश पाल ने बताया कि पिछले वर्ष 18 हजार रुपये में मिलने वाली एक ट्रॉली मिट्टी की कीमत अब बढ़कर करीब 23 हजार रुपये हो गई है। छह रुपये की कीमत वाला पुआल अब 17-18 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, प्रतिमा के ढांचे में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की कीमत एक हजार रुपये से बढ़कर करीब एक हजार 600 रुपये हो गई है। मजदूरी में भी इजाफा हुआ है। पांच सौ रुपये दैनिक मजदूरी लेने वाले श्रमिक अब छह सौ से सात सौ रुपये मांग रहे हैं, जबकि कुशल कारीगरों की मजदूरी करीब एक हजार रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में मूर्तिकारों का कहना है कि यदि प्रतिमाओं की कीमत नहीं बढ़ाई गई तो उनके लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
बढ़ती लागत को देखते हुए कई मूर्तिकार बड़ी प्रतिमाओं की बजाय छोटी प्रतिमाएं बनाने पर अधिक जोर दे रहे हैं। बताया गया कि करीब आठ पिकअप मिट्टी से 22 से 25 प्रतिमाएं तैयार की जा सकती हैं, लेकिन आपूर्तिकर्ताओं की ओर से मिट्टी की आपूर्ति भी कम होने की बात सामने आ रही है।
मूर्तिकारों के अनुसार, नौ से दस फीट की शोलापिथ प्रतिमा तैयार करने में करीब 20 हजार रुपये की लागत आ रही है। ऐसी प्रतिमा को कम से कम 27 से 30 हजार रुपये में बेचने पर ही मेहनत और लागत की भरपाई संभव है। वहीं, बड़ी प्रतिमा की निर्माण लागत यदि करीब 50 हजार रुपये आती है, तो 60 से 65 हजार रुपये में बिक्री होने पर ही कुछ मुनाफा संभव है।
बढ़ती लागत से परेशान मूर्तिकारों ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से सहायता की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में प्रतिमा निर्माण का कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है।
दूसरी ओर, प्रतिमाओं की संभावित बढ़ी कीमतों को लेकर पूजा कमेटियों भी चिंतित हैं। रायकोतपाड़ा पूजा कमेटी के सदस्य अनुराग मोदक ने कहा कि पिछले वर्ष प्रतिमा पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए थे। इस वर्ष कुछ वृद्धि स्वीकार्य है, लेकिन यदि मूर्तिकार एकमुश्त पांच हजार रुपये से अधिक की बढ़ोतरी करते हैं तो पूजा समितियों के बजट पर दबाव बढ़ेगा।
दुर्गापूजा से पहले मूर्तिकारों और पूजा आयोजकों के बीच कीमतों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर बढ़ती लागत ने मूर्तिकारों की परेशानी बढ़ा दी है, तो दूसरी ओर सीमित बजट में पूजा आयोजन करने वाले समितियों के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

