आरजी कर मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की समिति की पहली बैठक
कोलकाता, 03 सितंबर (हि. स.)। आर.जी. कर अस्पताल में महिला चिकित्सक-छात्रा की दुष्कर्म और हत्या तथा अस्पताल में भ्रष्टाचार के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित जांच समिति की पहली बैठक गुरुवार को हुई। सेवानिवृत्त न्यायाधीश शुभ्रकमल मुखर्जी की अध्यक्षता वाली इस समिति में राज्य के पूर्व स्वास्थ्य-शिक्षा निदेशक देवाशीष भट्टाचार्य, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तापस बसु और भाजपा के दो विधायक राजेश कुमार तथा दीपांजन चक्रवर्ती शामिल हैं।
स्वास्थ्य भवन के अनुसार, जांच से जुड़े अनुभव को देखते हुए दोनों भाजपा विधायकों को समिति में शामिल किया गया है। राजेश कुमार सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं, जबकि दीपांजन चक्रवर्ती राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के पूर्व कमांडो रहे हैं। समिति यह भी जांच करेगी कि आर.जी. कर अस्पताल में संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार का महिला चिकित्सक की मौत से कोई संबंध था या नहीं। स्वास्थ्य-शिक्षा विभाग के निदेशक ने इस संबंध में 29 अगस्त को अधिसूचना जारी की थी।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि आर.जी. कर की घटना ने पूरे बंगाल को गहराई से झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि घटना की वास्तविक सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच समिति गठित की गई है। सरकार पीड़िता के परिवार और पूरे चिकित्सक समाज के साथ है तथा बिना किसी समझौते के जल्द और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
इस मामले की जांच सबसे पहले कोलकाता पुलिस ने शुरू की थी। पुलिस ने मुख्य आरोपित संजय राय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। सीबीआई ने आरोप पत्र में संजय राय को एकमात्र आरोपित बताया। इसके बाद सियालदह अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हालांकि, पीड़िता के परिवार ने शुरू से ही पुलिस और सीबीआई की जांच पर असंतोष जताया। परिवार की याचिका के बाद उच्च न्यायालय ने सीबीआई को मामले की नए सिरे से जांच का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने छह अगस्त को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने कहा था कि जांच सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि नई जांच टीम भी पुरानी जांच से प्रभावित हो रही है।
पीड़िता के परिवार ने घटना से पहले उसके साथ मौजूद रहे चार जूनियर डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। परिवार के अनुसार, आठ अगस्त 2024 की रात पीड़िता ने कुछ सहकर्मियों के साथ रात का खाना खाया था। परिवार का आरोप है कि उसके साथ मौजूद चार जूनियर डॉक्टरों के तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक संदीप घोष से संपर्क थे। परिवार ने इन सभी से पूछताछ और गिरफ्तारी की मांग की है।
परिवार के वकील ने छह अगस्त को उच्च न्यायालय में दावा किया था कि घटना से पहले की परिस्थितियों की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया था कि उस रात पीड़िता के साथ भोजन करने वाले चार लोगों और संदीप घोष के बीच संबंधों की जांच क्यों नहीं की गई तथा उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ क्यों नहीं की गई। परिवार ने जूनियर डॉक्टर सौमित्र राय का भी नाम लिया है और आरोप लगाया है कि वह पीड़िता के साथ रात के भोजन में शामिल थे, लेकिन उनका बयान दर्ज नहीं किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

