बांकुड़ा के शाल वन में दुर्लभ मुकुट टिड्डा मिलने से बढ़ी उम्मीद
बांकुड़ा, 24 जुलाई (हि. स.)। जिले के सोनामुखी प्रखंड के मानिकबाजार स्थित शाल वन में दुर्लभ प्रजाति के मुकुट टिड्डा (हुडेड ग्रासहॉपर) का पता चला है। कई दशक बाद राढ़ बंगाल के वन क्षेत्र में इस दुर्लभ कीट के मिलने से वन विभाग और पर्यावरणविदों ने जंगली क्षेत्र की जैव विविधता के लिए इसे उत्साहजनक संकेत बताया है।
वन विभाग के अनुसार, सोनामुखी के वन क्षेत्राधिकारी निलय राय को पौधारोपण क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान शाल के एक पौधे की पत्ती पर यह दुर्लभ कीट दिखाई दिया। पहले इसे सामान्य पत्ती समझा गया, लेकिन ध्यान से देखने पर इसके शरीर की बनावट अलग दिखाई दी। तस्वीरों के परीक्षण के बाद इसकी पहचान टेराटोड्स मोंटिकोलिस अर्थात हुडेड ग्रासहॉपर के रूप में हुई।
वन अधिकारियों ने बताया कि इस कीट की सबसे बड़ी विशेषता इसका अद्भुत छद्मवेश है। इसके शरीर का ऊपरी भाग पत्ती जैसा दिखाई देता है, जिससे यह शाल की पत्तियों में आसानी से छिप जाता है और शिकारियों की नजर से बचा रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति भारत और श्रीलंका के कुछ वन क्षेत्रों में पाई जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका मिलना अत्यंत दुर्लभ है। इससे पहले झाड़ग्राम के लोधाशुली क्षेत्र में इस प्रजाति का पता चला था। अब सोनामुखी में इसकी उपस्थिति जंगली क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जा रही है।
वन क्षेत्राधिकारी निलय राय ने बताया कि पहले उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। तस्वीरों का विश्लेषण करने पर यह पुष्टि हुई कि यह वही दुर्लभ मुकुट टिड्डा है। उन्होंने कहा कि इसकी उपस्थिति सोनामुखी के वन क्षेत्र के लिए सुखद समाचार है।
वन विभाग ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी भेज दी है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन अधिकारियों का कहना है कि यह खोज इस बात का प्रमाण है कि जंगलमहल के वनों में अभी भी अनेक दुर्लभ और कम ज्ञात जीव प्रजातियां मौजूद हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

