चुनाव 26 : बंगाल की रानीगंज विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
आसनसोल, 25 मार्च (हि.स.)।
रानीगंज विधानसभा सीट, जिसे कभी ‘लाल दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था, इस बार त्रिकोणीय मुकाबले का केंद्र बन चुकी है। तृणमूल वामपंथी तथा भाजपा तीनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।
तृणमूल कांग्रेस जहां इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं वाम मोर्चा अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है। दूसरी ओर भाजपा पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज कर ‘कमल खिलाने’ की रणनीति पर काम कर रही है।
रानीगंज सीट का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। 1962 से 2021 तक कुल 15 चुनावों में से 13 बार वामपंथी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। केवल 2011 और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने इस ‘लाल दुर्ग’ में सेंधमारी की।
तृणमूल की एंट्री और बदलता समीकरण
2011 में पहली बार इस सीट पर बदलाव आया, जब (तृणमूल) ने जीत दर्ज कर वाम के किले में सेंध लगाई।
2016 में माकपा ने वापसी करते फिर से सीट पर कब्जा जमा लिया। लेकिन 2021 में फिर से तृणमूल ने बाजी मारी। गत विधानसभा चुनाव में तृणमूल को 78,164 वोट (विजेता), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 74,008 वोट (दूसरा स्थान), (माकपा) 21,658 वोट (तीसरा स्थान) मिला। वर्ष 2021 में भाजपा के दूसरे स्थान पर आने से रानीगंज का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया और माकपा तीसरे स्थान पर खिसक गई।
तृणमूल के लिए सीट बचाने की चुनौती
आसन्न चुनाव में तृणमूल के लिए जहां सीट बचाने की चुनौती है वहीं भाजपा पहली जीत हासिल करने को बेताब है। स्पष्ट है कि रानीगंज सीट इस बार सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने वाली जंग बन चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

