रानी रासमणि की जयंती पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया नमन
कोलकाता, 28 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दक्षिणेश्वर काली मंदिर की संस्थापिका लोकमाता रानी रासमणि की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने रानी रासमणि के सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
रानी रासमणि का जन्म 28 सितंबर, 1793 को वर्तमान उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर के कोना गांव में हुआ था। बंगाल के नवजागरण काल में उन्होंने समाजसेवी और जनहितैषी जमींदार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। पति के निधन के बाद उन्होंने जमींदारी की जिम्मेदारी संभाली और विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
रानी रासमणि ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सड़क निर्माण कराया। कोलकाता में गंगा स्नान के लिए बाबूघाट, आहिरीटोला घाट और निमतला घाट के निर्माण से भी उनका नाम जुड़ा है। उन्होंने तत्कालीन हिन्दू कॉलेज और इम्पीरियल लाइब्रेरी को आर्थिक सहायता भी प्रदान की थी।
रानी रासमणि की सबसे प्रमुख पहचान दक्षिणेश्वर काली मंदिर की संस्थापिका के रूप में है। हुगली नदी के किनारे उन्होंने मां भवतारिणी के मंदिर का निर्माण कराया। इसी मंदिर से बाद में स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जीवन और साधना गहराई से जुड़ी रही। रानी रासमणि ने उन्हें मंदिर में पुजारी के रूप में नियुक्त किया था और उन्हें संरक्षण भी दिया।
रानी रासमणि का जीवन सामाजिक सेवा के साथ-साथ तत्कालीन ब्रिटिश शासन के विरोध से जुड़ी घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। मछुआरों पर लगाए गए कर के विरोध सहित कई मामलों में उन्होंने जनहित से जुड़े मुद्दों पर ब्रिटिश प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखा। उनके जनकल्याणकारी कार्यों और सामाजिक योगदान के कारण बंगाल की लोकसंस्कृति में उन्हें सम्मानपूर्वक ‘लोकमाता रानी रासमणि’ कहा जाता है। रानी रासमणि का निधन 1861 में हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

