home page

चुनाव 26 : रायपुर विधानसभा में चतुष्कोणीय मुकाबला, कुड़मी वोट बने निर्णायक

 | 
चुनाव 26 : रायपुर विधानसभा में चतुष्कोणीय मुकाबला, कुड़मी वोट बने निर्णायक


बांकुड़ा, 16 अप्रैल (हि.स.)। जिले की रायपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला जबरदस्त हो गया है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने नए चेहरों को मैदान में उतारा है, जबकि वाममोर्चा और कांग्रेस भी चुनावी लड़ाई में मौजूद हैं। क्षेत्र में कुड़मी समुदाय के मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के कारण चुनावी गणित और जटिल हो गया है। आदिवासी कुड़मी समाज ने इस बार भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है, हालांकि इससे सभी कुड़मी वोट भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में जाएंगे, यह निश्चित नहीं माना जा रहा है।

जंगलमहल क्षेत्र की रायपुर विधानसभा सीट कभी वाममोर्चा का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। वर्ष 2011 में सत्ता परिवर्तन के समय भी यहां से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता स्वर्गीय उपेन किस्कू विजयी हुए थे। इसके बाद 2016 और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की। इस बार तृणमूल ने मौजूदा विधायक मृत्युंजय मुर्मू की जगह ठाकुरमणि सोरेन को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने क्षेत्रमोहन हांसदा को टिकट दिया है, जबकि माकपा की ओर से रामचंद्र मांडी उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के टिकट पर शुभ्रा हेम्ब्रम मुर्मू चुनाव लड़ रही हैं।

पूर्व विधायक मृत्युंजय मुर्मू का कहना है कि उन्होंने विधायक निधि का पूरा उपयोग क्षेत्र के विकास में किया है। पिछले पांच वर्षों में कई स्कूलों में बाउंड्री वॉल का निर्माण, बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन तथा ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई है। साथ ही कई स्थानों पर हाईमास्ट लाइट लगाई गई और खेल मैदानों का नवीनीकरण किया गया।

तृणमूल उम्मीदवार ठाकुरमणि सोरेन का दावा है कि राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से क्षेत्र के प्रत्येक परिवार को लाभ मिला है और इसी विकास के आधार पर उनकी जीत तय है।

दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार क्षेत्रमोहन हांसदा का आरोप है कि तृणमूल शासन में क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हुआ। उनका कहना है कि वास्तविक विकास के लिए लोग इस बार भाजपा को समर्थन देंगे। वहीं, माकपा उम्मीदवार रामचंद्र मांडी का दावा है कि क्षेत्र में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, लैम्प्स और कोल्ड स्टोरेज जैसे अधिकांश विकास कार्य वाममोर्चा सरकार के समय उपेन किस्कू के नेतृत्व में हुए थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के दावों के बावजूद इलाके में कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। रायपुर ग्रामीण अस्पताल को 100 बेड का दर्जा मिलने के बावजूद वहां पर्याप्त डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नहीं हैं। कृष्णपुर और गोयालडांगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले चौबीसों घंटे चिकित्सा सुविधा मिलती थी, जबकि अब केवल एक समय ओपीडी चलती है। क्षेत्र में सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल की मांग भी लंबे समय से अधूरी है।

इसके अलावा कंसाबती नदी पर सिमलिघाट और बामुंडीहा घाट पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से लंबित है। किसानों के लिए इलाके में केवल एक कोल्ड स्टोरेज है, जिसकी क्षमता बढ़ाने और नए कोल्ड स्टोरेज बनाने की मांग उठ रही है। कई स्कूलों में आदिवासी छात्रावास बंद पड़े हैं, जबकि राज्य सड़कों की हालत खराब और पेयजल की समस्या भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता