तृणमूल में रहकर भी दूरी क्यों, जॉन बारला की भूमिका पर उठे सवाल
जलपाईगुड़ी, 07 मई (हि. स.)। पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉन बारला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद राज्य अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन पूरे चुनाव अभियान में उनकी ‘निष्क्रियता’ अब सवालों के घेरे में है।
बताया जा रहा है कि न तो वह ममता बनर्जी के कार्यक्रम में नजर आए और न ही अभिषेक बनर्जी की सभाओं में सक्रिय दिखे। इससे पार्टी के अंदर ही उनकी भूमिका को लेकर धुंधली स्थिति बन गई है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि उनके अपने इलाके लक्ष्मीपाड़ा चाय बागान के सभी बूथों पर भाजपा को बढ़त मिली।
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव के बाद वह दिल्ली जाकर भाजपा के एक सांसद के साथ भी समय बिताते देखे गए। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह घटनाक्रम किसी नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा कर सकता है।
जॉन बारला ने कहा कि वह चाय बागान के मजदूरों के लिए काम करते रहेंगे। तृणमूल नेतृत्व ने भी संकेत दिया है कि चुनाव में नेताओं की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।
बारला ने यह भी स्वीकार किया कि भाजपा नेता बिमल गुरूंग के साथ उनकी दोस्ती अब भी कायम है, जिससे सियासी अटकलें और तेज हो गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

