खेत में खाद छिड़कते दिखे भाजपा विधायक लबसेन बास्के
पुरुलिया, 21 सितंबर (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की बंदवान विधानसभा सीट से भाजपा विधायक लबसेन बास्के इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर में बास्के अपने खेत में खुद खाद का छिड़काव करते नजर आ रहे हैं। विधायक के खेत में आम किसान की तरह काम करते इस दृश्य ने लोगों का ध्यान खींचा है।
लबसेन बास्के बंदवान विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं। बंदवान अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और यह क्षेत्र जंगलमहल का हिस्सा है। बंदवान और आसपास का इलाका अतीत में माओवादी हिंसा और नक्सली गतिविधियों से भी प्रभावित रहा है।
2026 के विधानसभा चुनाव में लबसेन बास्के ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार राजीब लोचन सारेन को 29,577 वोटों के अंतर से हराया। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार बास्के को 1,34,080 वोट मिले, जबकि राजीब लोचन सारेन को 1,04,503 वोट प्राप्त हुए।
बास्के का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह पहले भी बंदवान सीट से भाजपा के उम्मीदवार रह चुके हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उस समय उन्हें सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद 2026 में उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
चुनावी हलफनामे के मुताबिक बास्के की पेशेवर पहचान प्राथमिक शिक्षक के रूप में दर्ज है, जबकि उनकी पत्नी का पेशा खेती बताया गया है। इसलिए उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सीधे किसान विधायक कहना उचित नहीं होगा। हालांकि खेत में स्वयं खाद का छिड़काव करते हुए उनकी तस्वीर यह जरूर दिखाती है कि उनका ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ाव बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर तस्वीर को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे जनप्रतिनिधि के जमीन से जुड़े होने की तस्वीर के तौर पर देख रहे हैं। वहीं, तस्वीर के साथ कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी की जा रही हैं।
बंदवान जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्र से आने वाले एक निर्वाचित विधायक का खेत में स्वयं खाद डालते हुए दिखाई देना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आम तौर पर विधायक और मंत्रियों की तस्वीरें राजनीतिक कार्यक्रमों, सभाओं और प्रशासनिक बैठकों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में खेत में काम करते लबसेन बास्के की तस्वीर ने उनके राजनीतिक जीवन के साथ उनके ग्रामीण जीवन की झलक भी सामने रखी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

