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पर्यावरण संरक्षण को लेकर कॉलेज प्राचार्य पर हुआ था घातक हमला, न्याय के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

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पर्यावरण संरक्षण को लेकर कॉलेज प्राचार्य पर हुआ था घातक हमला, न्याय के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र


कोलकाता, 16 मई (हि. स.)। नदिया जिले के चपड़ा स्थित सरकारी जनरल डिग्री कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सुभाषिस पांडा ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को शुक्रवार को एक विस्तृत पत्र लिखकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। डॉ. पांडा ने शनिवार को आरोप लगाया कि जैव विविधता संरक्षण के कार्य में जुटे रहने के कारण उन पर जानलेवा हमला किया गया था, राजनीतिक दबाव बनाया गया और बाद में उन्हें प्रशासनिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा।

डॉ. पांडा, जो पश्चिम बंगाल सीनियर एजुकेशन सर्विस के अधिकारी और प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक हैं, ने अपने पत्र में बताया कि दो जुलाई 2025 की शाम वह राजीपुर स्थित बीएसएफ चेकपोस्ट के पास “जैव विविधता संवेदनशील क्षेत्र संरक्षण” स्थल का निरीक्षण कर रहे थे। तभी स्थानीय निवासी अजय घोष वहां पहुंचा और संरक्षण बोर्ड लगाने को लेकर सवाल पूछने लगा। आरोप है कि बात बढ़ते ही उसने डॉ. पांडा पर हमला कर दिया। उन्हें थप्पड़ मारे गए, मुक्कों से पीटा गया और जान से मारने की कोशिश की गई। कॉलेज के सुरक्षाकर्मी मनीरुल हसन के हस्तक्षेप से उनकी जान बच सकी।

हमले के बाद गंभीर रूप से घायल डॉ. पांडा को पहले चापड़ा ब्लॉक अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में कोलकाता के मणिपाल ब्रॉडवे अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक उनका इलाज चला। चिकित्सकीय रिपोर्ट में “हमला और बहुस्तरीय चोट” का उल्लेख किया गया।

डॉ. पांडा ने चापड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि तत्कालीन विधायक रुकबानूर रहमान के दबाव में पुलिस शुरू में मामला दर्ज करने से बचती रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपित अजय घोष को राजनीतिक प्रभाव के चलते अगले ही दिन जमानत मिल गई।

अपने पत्र में डॉ. पांडा ने उच्च शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे प्राथमिकी वापस लेने का दबाव बनाया गया। यहां तक कि उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो उनके लिए स्थिति और कठिन हो सकती है। बाद में उनका तबादला सिंगुर सरकारी कॉलेज में कर दिया गया, जिसे उन्होंने “दंडात्मक तबादला” बताया है।

डॉ. पण्डा ने वर्ष 2021 से चापड़ा कॉलेज में “स्थानीय जैव विविधता संवेदनशील क्षेत्र संरक्षण परियोजना” शुरू की थी। इस परियोजना को पश्चिम बंगाल जैव विविधता बोर्ड का तकनीकी सहयोग प्राप्त है। इन संरक्षित क्षेत्रों में औषधीय पौधों, दुर्लभ सर्पों, तितलियों, फलाहारी चमगादड़ों और परागण करने वाले कीटों की 50 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. पांडा को वर्ष 2007 में नई पादप प्रजाति की खोज के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। उनकी पर्यावरण संरक्षण पहल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है।

इस घटना को हिन्दुस्थान समाचार ने प्रमुखता से उठाया था। इसके अलावा कई स्थानीय समाचार पत्रों ने भी मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। घटना के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में प्रदर्शन भी किया था।

मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में डॉ. पांडा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जैव विविधता संवेदनशील क्षेत्रों को नष्ट होने से बचाया जाए। उन्होंने लिखा, “यदि मुझे मार भी दिया जाए, तब भी इन जैव विविधता क्षेत्रों को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचा लिया जाए।”

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय