नेपाल में सिर्फ 15 मिनट की देरी बनी जीवन रक्षक
कोलकाता , 29 अगस्त (हि.स.)।
कभी-कभी जिंदगी में कुछ मिनटों की देरी भी किस्मत बदल देती है। नेपाल में आई भीषण आपदा के बीच बसीरहाट के एक सेवानिवृत्त शिक्षक दंपति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। काठमांडू से वाहन पकड़ने में महज 15 मिनट की देरी उनके लिए जीवन रक्षक साबित हुई और आज दोनों सुरक्षित हैं।
बसीरहाट नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 अंतर्गत कचहरीपाड़ा इलाके के निवासी एवं पूर्व स्कूल शिक्षक अनुकूल पोद्दार अपनी पत्नी रेबा पोद्दार के साथ नेपाल घूमने गए थे। नेपाल में आई त्रासदी के बाद अचानक उनसे संपर्क टूट गया। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी उनकी सलामती को लेकर चिंतित हो उठे। लगातार फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
काफी चिंता और इंतजार के बाद आखिरकार शिक्षक दंपति से शुक्रवार की शाम संपर्क स्थापित हुआ।
फोन पर हुई बातचीत में अनुकूल पोद्दार ने परिवार को बताया कि वे एक बड़े खतरे से बच गए हैं।
बताया जा रहा है कि काठमांडू से आगे की यात्रा के लिए वाहन में सवार होने के दौरान वे करीब 15 मिनट देर से पहुंचे, जिसके कारण उन्हें पहले वाहन के बजाय दूसरे वाहन में सवार होना पड़ा। यही 15 मिनट की देरी उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला साबित हुई। जिस भयावह त्रासदी से वे बच निकले, उसके बारे में बताते हुए परिवार ने कहा कि उनके ऊपर से एक बड़ा संकट गुजर गया।
नेपाल में आई आपदा के बाद उनके साथ यात्रा कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। हालांकि फोन पर मिली जानकारी के अनुसार, उनके साथ यात्रा करने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं। बावजूद इसके, वहां के हालात को देखकर शिक्षक दंपति अभी भी काफी चिंतित और भयभीत हैं।
कई दिनों की चिंता के बाद अनुकूल पोद्दार और रेबा पोद्दार के सुरक्षित होने की खबर मिलने से परिवार और पड़ोसियों ने राहत की सांस ली है। दंपति ने फोन पर बताया कि वे जल्द ही भारत लौटने की तैयारी कर रहे हैं और रविवार तक घर पहुंचने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की ओर से भी नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाने और उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करने की घोषणा की गई है। ऐसे में अब परिवार को इंतजार है उस पल का, जब दोनों सुरक्षित अपने घर लौट आएंगे।
पड़ोसियों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के उस भयावह दौर में महज 15 मिनट की देरी का इस तरह जीवन बचाने का कारण बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
अब पूरे कचहरीपाड़ा इलाके की एक ही प्रार्थना है—नेपाल की त्रासदी से बचकर निकले अनुकूल पोद्दार और रेबा पोद्दार सहित वहां फंसे सभी लोग जल्द से जल्द सुरक्षित और स्वस्थ अपने घर लौट आएं।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के 85 लापता पर के पर्यटकों की सूची में पोद्दार दंपति का नाम भी शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

