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पेट्रापोल सीमा पर श्रमिक संगठनों में गुटबाजी, 36 घंटे से ठप पड़ा माल परिवहन

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कोलकाता, 03 नवंबर (हि.स.)।

पश्चिम बंगाल में श्रमिक संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई सामने आई है। उत्तर 24 परगना जिले के भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा स्थित पेट्रापोल स्थलबंदर पर श्रमिक संगठनों के बीच काम के बंटवारे को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि पिछले करीब 36 घंटे से माल परिवहन का काम बुरी तरह प्रभावित है। इसका सीधा असर भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और पश्चिम बंगाल के खाद्यमंत्री अशोक कीर्तनिया के करीबी माने जाने वाले श्रमिक संगठनों के नेताओं के बीच मतभेद बताया जा रहा है। भाजपा के एक सूत्र के मुताबिक, पेट्रापोल सीमा पर श्रमिकों को काम देने के प्रतिशत को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराया है। मंगलवार से परिवहन व्यवस्था सामान्य करने के लिए ऊपर से निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।

दरअसल, राज्य में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद पेट्रापोल सीमा पर माल ढुलाई के काम में श्रमिक संगठनों का प्रभाव बदलने लगा था। पहले यहां तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन का दबदबा था, लेकिन बाद में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) का प्रभाव बढ़ा। श्रमिक नेताओं के एक वर्ग का कहना है कि वर्ष 2011 से विभिन्न श्रमिक संगठनों के बीच काम के बंटवारे को लेकर एक समझौता चला आ रहा था। इसके तहत प्रत्येक संगठन को काम का एक निश्चित प्रतिशत मिलता था और उसी के अनुसार श्रमिक काम करते थे। हालांकि, पिछले कुछ समय से इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है।

बताया जाता है कि कुछ समय पहले बनगांव उत्तर के विधायक एवं राज्य के खाद्यमंत्री अशोक कीर्तनिया ने पेट्रापोल सीमा का दौरा कर लैंड पोर्ट अथॉरिटी के प्रबंधक और बीएमएस के नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक के बाद काम के बंटवारे को लेकर एक व्यवस्था तय की गई थी। इसके अनुसार बीएमएस के श्रमिकों को 78 प्रतिशत और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों को 22 प्रतिशत काम देने की बात कही गई थी।

लेकिन कुछ समय बाद बीएमएस के भीतर ही दो गुट बन गए और काम के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद बनगांव के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने पेट्रापोल स्थलबंदर के प्रबंधक के साथ बैठक कर काम के बंटवारे का नया फार्मूला तय किया।

इस नए फार्मूले के तहत सीआईटीयू को 30 प्रतिशत और बीएमएस को 70 प्रतिशत काम देने की बात सामने आई। वहीं बीएमएस के 70 प्रतिशत हिस्से में से बीएमएस-1 को 50 प्रतिशत और बीएमएस-2 को 20 प्रतिशत काम देने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, खाद्यमंत्री अशोक कीर्तनिया के करीबी माने जाने वाले बीएमएस नेताओं ने इस व्यवस्था को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि बीएमएस एक ही संगठन है और उसके भीतर इस तरह दो गुट बनाकर काम का प्रतिशत निर्धारित करने का अधिकार किसी मंत्री को नहीं है।

बीएमएस की बनगांव नगर समिति के सचिव राजीव गोस्वामी ने केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के फैसले पर खुलकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बीएमएस एक ही संगठन है। संगठन के भीतर दो हिस्से बनाकर काम का प्रतिशत तय करने का अधिकार किसी भी मंत्री को नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने अपनी मर्जी से काम का बंटवारा कर दिया है। इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो बीएमएस किसी की पारिवारिक संपत्ति हो।

राजीव गोस्वामी ने सीआईटीयू को 30 प्रतिशत काम दिए जाने के पीछे के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत राज्य और केंद्रीय स्तर के संगठन नेतृत्व से भी की जा रही है।

फिलहाल पेट्रापोल सीमा पर श्रमिक संगठनों के बीच जारी इस विवाद के कारण माल ढुलाई व्यवस्था प्रभावित है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण इस सीमा पर परिवहन कार्य बाधित होने से व्यापारियों और कारोबार से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य स्तर के नेतृत्व के हस्तक्षेप से विवाद का समाधान निकलता है या पेट्रापोल में माल परिवहन का संकट और लंबा खिंचता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा