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शिक्षक भर्ती घोटाला : पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी पर जमानत की शर्तें तोड़ने का आरोप, सीबीआई पहुंची अदालत

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शिक्षक भर्ती घोटाला : पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी पर जमानत की शर्तें तोड़ने का आरोप, सीबीआई पहुंची अदालत


कोलकाता, 17 सितंबर (हि. स.)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पर करोड़ों रुपये के कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) शिक्षक भर्ती घोटाले में जमानत की शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी का आरोप है कि जमानत की शर्तों के अनुसार पार्थ चटर्जी नियमित रूप से सीबीआई कार्यालय में पेश नहीं हो रहे हैं। इस मामले को लेकर सीबीआई ने कोलकाता के बिचार भवन स्थित विशेष अदालत का रुख किया है।

अदालत में पार्थ के वकील ने अपने मुवक्किल की खराब सेहत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री बीमार हैं और उन्हें बीच-बीच में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। वकील ने अदालत को बताया कि वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगने के लिए केंद्रीय एजेंसी को ईमेल भी भेजा गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपित पार्थ चटर्जी को पिछले साल नवंबर में जमानत पर रिहा किया गया था। उनकी रिहाई गिरफ्तारी के तीन साल, तीन महीने और 19 दिन बाद हुई थी। सितंबर 2025 में जमानत देते समय कलकत्ता हाई कोर्ट ने कई शर्तें लगाई थीं, जिनमें से एक अहम शर्त हफ्ते में एक बार जांच अधिकारी के सामने पेश होना था। हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत उनकी जमानत रद्द कर सकती है। इसी आधार पर सीबीआई ने गुरुवार को विशेष अदालत में शिकायत दर्ज कराई है।

सीबीआई मामले में हाई कोर्ट ने पार्थ चटर्जी को 10 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी। शर्तों के मुताबिक, उन्हें अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना था, बिना अनुमति के अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाना था और सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में पेश होना था। इसके अलावा, उन्हें गवाहों को डराने या सबूतों से छेड़छाड़ न करने, हफ्ते में एक बार जांच अधिकारी को रिपोर्ट करने, कोई सरकारी पद न संभालने और आपराधिक गतिविधियों से दूर रहने का भी निर्देश दिया गया था।

उन्हें गवाहों से संपर्क करने की सख्त मनाही है और अपना मोबाइल नंबर अदालत व जांच एजेंसी को देना है, जिसे वे बिना अनुमति नहीं बदल सकते।

हालांकि, उन्हें विधायक के रूप में काम करने की छूट दी गई थी, भले ही हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिला था।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जुलाई 2022 में करोड़ों रुपये के एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में संलिप्तता के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री को गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के दिन ईडी ने उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। अर्पिता को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में इसी भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अर्पिता मुखर्जी को 2024 में जमानत मिल गई थी।

पिछले साल सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पार्थ चटर्जी को जमानत दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के कारण उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया जा सका। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत द्वारा दो महीने के भीतर अहम गवाहों से पूछताछ पूरी होने के बाद ही पूर्व मंत्री को छोड़ा जाए। आखिरकार 11 नवंबर 2025 को उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर