त्योहार के माहौल के बीच पांडुआ में ईडी की छापेमारी, सेवानिवृत्त आयकर अधिकारी के घर तलाशी
हुगली, 04 नवंबर (हि. स.)। त्योहार के माहौल के बीच हुगली जिले के पांडुआ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी से इलाके में हलचल मच गई। केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बुधवार सुबह केंद्रीय बलों के साथ पांडुआ के इलछोबा दक्षिणपाड़ा निवासी नारायण दास के घर तलाशी अभियान चलाया।
सूत्रों के अनुसार, नारायण दास आयकर विभाग में कार्यरत थे और कुछ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नारायण दास और उनका परिवार बहुत अधिक लोगों से मेलजोल नहीं रखता था। फिलहाल उनका बेटा कल्याणी में रहता है और एक ग्रामीण के मुताबिक, वह नेटवर्किंग व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।
खबर लिखे जाने तक पांडुआ में हुई इस छापेमारी के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ईडी ने कोलकाता के कई स्थानों पर छापेमारी की थी। आरोप है कि एक वित्तीय निवेश कंपनी ने मोटे मुनाफे का लालच देकर आम लोगों से धन एकत्र किया था। इसके अलावा, आसनसोल में भी एक कारोबारी के घर ईडी ने तलाशी अभियान चलाया था।
इसी क्रम में बुधवार को दक्षिण 24 परगना के नरेंद्रपुर स्थित कमालगाजी इलाके में श्यामल व्यापारी नामक कारोबारी के घर भी ईडी ने छापेमारी की। कारोबारी पर हवाला के माध्यम से धन हस्तांतरण का आरोप है। गुवाहाटी के एक मामले के आधार पर ईडी इस मामले की जांच कर रही है। पांडुआ में हुई छापेमारी का इन मामलों से कोई संबंध है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इस बीच, पिछले महीने ईडी ने अवैध कोयला तस्करी मामले में बड़ी कार्रवाई की थी। प्रवर्तन निदेशालय के मुख्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की लीज पर दी गई कोयला खदानों से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला निकासी और तस्करी की जांच के सिलसिले में 136.44 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की गई थी। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत की गई थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व में एक अवैध सिंडिकेट संचालित होता था। यह सिंडिकेट खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालने और उसकी बड़े पैमाने पर तस्करी में शामिल था। आरोप है कि बाद में इस कोयले को पश्चिम बंगाल के विभिन्न कारखानों में नकद रकम लेकर बेचा जाता था। जांच में स्थानीय प्रशासन के कुछ अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत का आरोप भी सामने आया है।
ईडी के मुताबिक, अवैध कोयला बिक्री से प्राप्त धन के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व को छिपाने के लिए अनूप मांझी के स्वामित्व वाली कई फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। इन कंपनियों का संचालन उनके रिश्तेदारों, कर्मचारियों और करीबी सहयोगी गुरुपद मांझी के नाम पर किया जाता था।
जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला बिक्री से प्राप्त नकदी को विभिन्न कंपनियों के माध्यम से वित्तीय लेन-देन में हेरफेर कर बैंक खातों में जमा कराया जाता था, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और मालिकाना हक को छिपाया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

