पंचगछिया में मानिक उपाध्याय स्मृति भवन सील किया गया, राजनीतिक माहौल गरमाया
पश्चिम बर्दवान, 16 जून (हि. स.)। बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के पंचगछिया इलाके में मंगलवार को प्रशासन की कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। जिला प्रशासन और बाराबनी प्रशासन की संयुक्त टीम ने यहां स्थित मानिक उपाध्याय स्मृति भवन को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह भवन लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यालय के रूप में भी उपयोग में था और इलाके में इसे पार्टी कार्यालय के रूप में पहचान मिली हुई थी। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जिस जमीन पर भवन बना है उसे सरकारी जमीन बताया जा रहा है। इसी आधार पर सील करने की कार्रवाई की गई है। हालांकि अधिकारियों ने इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासनिक टीम ने स्थल का निरीक्षण करने के बाद भवन को बंद कर दिया, जिसके बाद आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आसनसोल नगर निगम के मेयर और स्वर्गीय मानिक उपाध्याय के पुत्र विधान उपाध्याय ने कहा कि उन्हें भी भवन सील किए जाने की जानकारी मिली है। उनके अनुसार, यह भवन एक सामुदायिक भवन के रूप में उपयोग किया जाता था, जहां स्थानीय लोग और कार्यकर्ता बैठते थे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद ही विस्तृत प्रतिक्रिया दी जाएगी।
इस बीच भाजपा नेता अभिजीत राय ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित और व्यवस्थित नगर व्यवस्था के लिए अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसले हुए हैं और इस मामले में भी कानून के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से भवन सील करने के विस्तृत कारणों पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की नजर जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और आगामी प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

