घरेलू सहायिकाओं समेत असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को भी मिले सवैतनिक मातृत्व अवकाश : स्वास्थ्य मंत्री
कोलकाता, 05 अगस्त (हि. स.)। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बुधवार को कोलकाता मेडिकल कॉलेज में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए भी सवैतनिक मातृत्व अवकाश की व्यवस्था करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि घरेलू सहायिकाओं, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य असंगठित क्षेत्र की महिला कर्मियों को मातृत्व के दौरान पर्याप्त अवकाश मिलना चाहिए, ताकि वे अपने नवजात शिशु को समय पर स्तनपान करा सकें।
कार्यक्रम का आयोजन बंगाल प्रसूति एवं स्त्री रोग सोसाइटी (बीओजीएस) तथा भारतीय प्रसवकाल एवं प्रजनन जीवविज्ञान सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र की महिला कर्मियों को मातृत्व के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं। उन्होंने सवाल उठाया कि घरों में काम करने वाली महिलाएं या खेतिहर दिहाड़ी श्रमिक यदि छह से आठ घंटे तक काम पर रहती हैं, तो वे अपने शिशु को समय पर स्तनपान कैसे कराएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि मां का पहला पीला और गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम (खीस) कहा जाता है, नवजात शिशु के लिए अमृत के समान है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और जन्म के बाद होने वाले शुरुआती संक्रमणों से उसकी रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना अत्यंत आवश्यक है और किसी भी परिस्थिति में मां का पहला दूध नहीं फेंकना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण कई स्थानों पर नवजात को पहला दूध नहीं पिलाया जाता। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इस विषय में अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रसूति वार्डों में स्तनपान कक्ष स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और नर्सों को इस विषय में और अधिक संवेदनशील तथा प्रशिक्षित बनाया जाना चाहिए, ताकि स्तनपान के दौरान माताओं की निजता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी अस्पतालों में महिलाएं वार्ड के बिस्तरों पर ही शिशुओं को स्तनपान कराती हैं। स्तनपान कक्ष बनने से माताएं एक सुरक्षित और एकांत स्थान पर अपने शिशुओं को स्तनपान करा सकेंगी।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

