मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में अधिकारियों को ही थमाए गए नोटिस
मेदिनीपुर, 19 जनवरी (हि. स.)। पूर्व मेदिनीपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया ने एक अभूतपूर्व विवाद को जन्म दे दिया है। अब तक जो प्रशासनिक तंत्र आम जनता को मतदाता पहचान पत्र की त्रुटियों के सुधार हेतु सूचना-पत्र (नोटिस) भेजकर सुनवाई के लिए बुला रहा था, अब वही तंत्र स्वयं अपनी ही प्रणाली की मार झेल रहा है। तमलुक विधानसभा क्षेत्र में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारी (एईआरओ) और बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को डेटा में विसंगतियों का हवाला देकर सुनवाई के सूचना-पत्र थमाए गए हैं। इस घटनाक्रम से प्रशासनिक गलियारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, तमलुक के प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारी (एईआरओ) शेख वसीम रज़ा को रविवार को चुनाव विभाग की ओर से पुनरीक्षण संबंधी सूचना-पत्र प्राप्त हुआ। विडंबना यह है कि रज़ा वर्तमान में स्वयं प्रतिदिन सैकड़ों मतदाताओं की सूचनाओं में सुधार के लिए उनकी सुनवाई कर रहे हैं। हावड़ा के उलूबेरिया दक्षिण क्षेत्र के निवासी रज़ा को भेजे गए इस पत्र में उनके अथवा उनके पिता के नाम में विसंगति का उल्लेख किया गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी का तर्क है कि सभी आवश्यक दस्तावेज एवं जानकारी सही होने के बावजूद यह कार्रवाई तंत्र की अपरिपक्वता को दर्शाती है।
इस प्रकरण की जद में केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरी शृंखला है। हावड़ा निवासी एक अन्य निर्वाचन अधिकारी मुकुल कुमार दास, तमलुक के बूथ संख्या 207 के अधिकारी अनूप माइती और बूथ संख्या 83 के अधिकारी हारून अल रशीद शेख को भी इसी प्रकार के सूचना-पत्र भेजे गए हैं। अधिकारी हारून को आगामी 24 जनवरी को साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के एक बड़े वर्ग का आरोप है कि इस अनावश्यक प्रक्रिया से न केवल उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में भी व्याघात पहुंच रहा है। अधिकारियों का प्रश्न है कि यदि वे स्वयं अपनी त्रुटियों को सिद्ध करने के लिए अन्यत्र सुनवाई में व्यस्त रहेंगे, तो आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध निवारण कैसे संभव होगा?
स्थानीय नागरिकों और पीड़ित अधिकारियों का मानना है कि यह गंभीर संकट चुनाव विभाग की 'कृत्रिम मेधा' (एआई) आधारित प्रणाली और सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों के कारण उत्पन्न हुआ है। अब मांग की जा रही है कि निर्वाचन आयोग इस तकनीकी अव्यवस्था में तत्काल हस्तक्षेप करे, ताकि प्रशासनिक तंत्र को इस व्यर्थ की भागदौड़ से राहत मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

