तारों के जंजाल से मिलेगी राहत, उत्तर बंगाल के चार और शहरों में भूमिगत होगी बिजली आपूर्ति
सिलीगुड़ी, 15 सितंबर (हि. स.)। कूचबिहार और सिलीगुड़ी के बाद अब उत्तर बंगाल के चार और शहरों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को भूमिगत किया जा रहा है। इससे शहरों को तारों के जंजाल से राहत मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक ने राज्य को करीब 513 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है।
राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार, उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, जयगांव और बालुरघाट में पहले चरण के काम के लिए क्रमशः 151 करोड़, 130 करोड़, 100 करोड़ और 132 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन चारों शहरों में काम के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं और अगले तीन महीनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिलीगुड़ी में ग्रिड आधुनिकीकरण परियोजना के तहत 19 वार्डों में बिजली की लाइनें भूमिगत करने का काम वर्ष 2024 में शुरू हुआ था, जो अब अंतिम चरण में है। विश्व बैंक की ओर से सिलीगुड़ी के लिए अतिरिक्त करीब 80 करोड़ रुपये मिलने के बाद महानंदा नदी के दूसरी ओर हिल कार्ट रोड के दोनों तरफ की बिजली लाइनों को भी भूमिगत किया जा रहा है। यह काम नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
वहीं, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक जैसे पहाड़ी पर्यटन शहरों में भी बिजली आपूर्ति को भूमिगत करने की योजना है। इन शहरों के लिए डीपीआर तैयार हो चुका है और राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने विश्व बैंक के समक्ष प्रस्ताव भेजा है। चारों शहरों के लिए पहले चरण में करीब 377 करोड़ रुपये की मांग की गई है। चालू वित्त वर्ष में इस राशि की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

