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एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने के बावजूद ‘नो मैपिंग’ सूची में नाम

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एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने के बावजूद ‘नो मैपिंग’ सूची में नाम


मेदिनीपुर, 19 जनवरी (हि.स.)।पश्चिम मेदिनीपुर जिले के गड़बेता-एक, गड़बेता-दो और गड़बेता-तीन प्रखंड क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे घुमंतू और बनजारा समुदाय के कई परिवार इन दिनों गहरी अनिश्चितता और चिंता में हैं। एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने के बावजूद नाम ‘नो मैपिंग’ सूची में शामिल होने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत सुनवाई का नोटिस मिलने से इन परिवारों में भय का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, गड़बेता-दो प्रखंड के जोगारडांगा ग्राम पंचायत अंतर्गत मालिबांधी और नगरा इलाकों में कुछ घुमंतू परिवार पिछले कुछ वर्षों से स्थायी रूप से बस गए हैं। झोपड़ी बनाकर रहने वाले इन परिवारों ने स्थानीय स्तर पर आधार कार्ड, राशन कार्ड और हाल के वर्षों में मतदाता पहचान पत्र भी बनवा लिया है। बावजूद इसके, वर्ष दो हजार दो की मतदाता सूची में नाम न होने के कारण उनकी मैपिंग नहीं हो सकी।

‘नो मैपिंग’ सूची में नाम आने के बाद इन परिवारों को संशोधन प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए बुलाया गया है। सोमवार को गड़बेता-दो बीडीओ कार्यालय में रीना कर्मकार, शिखा कर्मकार, मणि कर्मकार, दीपक कर्मकार, मनोरंजन माहली, चुनी माहली, भूतनाथ माहली, लाल माहली और देवा माहली सहित कई लोग सुनवाई में उपस्थित हुए।

परिवारों का कहना है कि वे मूल रूप से घुमंतू जीवन जीते रहे हैं और किसी स्थान को पैतृक घर के रूप में चिन्हित नहीं कर सकते। रीना कर्मकार ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व ही वे इस इलाके में आकर बसे हैं। उनके पास आधार, राशन और हाल में बने मतदाता पहचान पत्र के अलावा कोई अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। वर्ष दो हजार दो की मतदाता सूची में नाम होना उनके लिए संभव ही नहीं था।

स्थानीय बीएलओ एवं प्राथमिक शिक्षक सुनील कुमार हेंब्रम ने बताया कि उनके बूथ क्षेत्र में ऐसे तेरह मतदाता हैं, जिन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है, लेकिन उनके पास अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, गड़बेता-दो पंचायत समिति के अध्यक्ष दीनबंधु दे ने कहा कि पूर्व में घुमंतू या बंजारा जीवन जीने वाले कुछ परिवारों को सुनवाई में बुलाया गया है और उनका भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है।

इधर, गड़बेता-तीन प्रखंड के चंद्रकोणा रोड स्टेशन संलग्न इलाके में भी कई घुमंतू परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। सुनवाई में पहुंचीं चौबीस वर्षीय कलावती सिंह ने बताया कि उनका मूल निवास राजस्थान में है। उन्होंने दादा-दादी से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रशासन को सौंपे हैं, लेकिन इसके बावजूद मतदाता सूची में नाम शामिल होगा या नहीं, इसे लेकर संशय बना हुआ है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम वर्ष दो हजार दो की मतदाता सूची में नहीं हैं और जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है, उन्हें नियमानुसार सुनवाई के लिए बुलाया गया है। अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही लिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता