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दुर्गापुर एनआइआइटी से गायब 50 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट, केंद्रीय ऑडिट संस्था ने भेजा पत्र

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दुर्गापुर एनआइआइटी से गायब 50 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट, केंद्रीय ऑडिट संस्था ने भेजा पत्र


पश्चिम बर्दवान, 09 अगस्त (हि. स.)। दुर्गापुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एन आइआइटी) से 50 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। इस मामले के सामने आने के बाद संस्थान की वित्तीय व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय ऑडिट संस्था, डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट (सेंट्रल) की ओर से 30 जुलाई को एनआइआइटी दुर्गापुर प्रबंधन को पत्र भेजकर फिक्स्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने पर सवाल उठाए गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 को दुर्गापुर एनआइआइटी प्रबंधन ने एक सरकारी बैंक में मौजूद अपने खाते से 50 करोड़ रुपये निकालकर एक निजी बैंक में एक वर्ष के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट किया था।

बताया गया है कि इस फिक्स्ड डिपॉजिट की एंट्री संस्थान के खातों में 31 मार्च 2026 को दर्ज की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 17 दिसंबर को किए गए निवेश का विवरण करीब चार महीने बाद संस्थान के रिकॉर्ड में क्यों दर्ज किया गया।

केंद्रीय ऑडिट संस्था की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निजी बैंक की ओर से जारी फिक्स्ड डिपॉजिट का मूल सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसके कारण ऑडिट टीम फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों का सत्यापन नहीं कर सकी।

ऑडिट के दौरान यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया कि फिक्स्ड डिपॉजिट किन शर्तों पर किया गया है, इसकी अवधि पूरी होने पर कितनी राशि प्राप्त होगी और फिक्स्ड डिपॉजिट का वास्तविक मालिक कौन है। इसके चलते 50 करोड़ रुपये के इस निवेश की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही एनआइआइटी की आंतरिक वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है।

बताया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही की ऑडिट प्रक्रिया के दौरान फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी यह गड़बड़ी सामने आई।

इस मामले में दुर्गापुर एनआइआइटी के निदेशक अरविंद चौबे ने कहा कि उन्हें ऑडिट संस्था का पत्र मिला है। उन्होंने बताया कि सरकारी बैंक की तुलना में निजी बैंकों में ब्याज दर अधिक थी। इसी वजह से सरकारी बैंक के बजाय निजी बैंक में 50 करोड़ रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट की गई।

निदेशक के अनुसार, इस संबंध में विभिन्न बैंकों से कोटेशन मंगाए गए थे। जिस बैंक ने सबसे अधिक ब्याज दर की पेशकश की, वहां 50 करोड़ रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट की गई।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं था। इसके लिए एक कमेटी गठित है और कमेटी के निर्णय के आधार पर ही सरकारी बैंक से रकम निकालकर निजी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट किया गया। हालांकि, जब फिक्स्ड डिपॉजिट के मूल सर्टिफिकेट के बारे में उनसे पूछा गया तो निदेशक ने कहा कि वह इस मामले को खुद नहीं देखते हैं।

दुर्गापुर एन आइआइटी इससे पहले भी कई विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। शिक्षक नियुक्ति से संबंधित मामलों में भी संस्थान में अनियमितता के आरोप सामने आ चुके हैं। करीब साढ़े तीन वर्ष पहले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के कारण मौजूदा निदेशक को कुछ समय के लिए संस्थान छोड़ना पड़ा था।

इसके अलावा एनआइआइटी परिसर में पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती को बुलाकर छात्रों को दीक्षा दिलाने की व्यवस्था को लेकर भी उस समय विवाद पैदा हुआ था।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा