रामनवमी हिंसा मामले में अपरूपा पोद्दार के पति शाकिर अली गिरफ्तार
कोलकाता, 30 जून (हि. स.)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2023 के रामनवमी हिंसा मामले की जांच के सिलसिले में मंगलवार को पूर्व अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सांसद अपरूपा पोद्दार के पति मोहम्मद शाकिर अली को गिरफ्तार किया। शाकिर अली हुगली जिले की ऋषड़ा नगरपालिका के वार्ड नंबर चार के तृणमूल पार्षद हैं।
जानकारी के अनुसार, तीन वर्ष पहले रामनवमी जुलूस के दौरान हुगली समेत राज्य के कई इलाकों में फैली हिंसा की जांच में केंद्रीय एजेंसी ने फिर से सक्रियता बढ़ाई है। इसी मामले में एनआईए के अधिकारी चार वाहनों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के साथ मंगलवार सुबह ऋषड़ा स्थित अपरूपा पोद्दार के आवास पर पहुंचे। सुबह से ही पूरे घर को केंद्रीय बलों ने घेर लिया और परिवार के सदस्यों की आवाजाही सीमित कर दी गई।
घटना की सूचना पाकर पश्चिम बंगाल पुलिस भी मौके पर पहुंची। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान घर के गेट पर और आस पास तैनात रहे। जांच के दौरान किसी को घर के अंदर जाने या घर से बाहर आने की अनुमति नहीं थी। सुबह से चली तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों ने तृणमूल पार्षद शाकिर अली से पूछताछ की और बातों में असंगति मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
एनआईए सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 में रामनवमी शोभायात्रा को लेकर हुगली के रिषड़ा , कोन्नगर, हावड़ा के शिवपुर तथा उत्तर दिनाजपुर के डालखोला सहित राज्य के कई क्षेत्रों में व्यापक हिंसा भड़की थी। कई जगहों पर तोड़फोड़, आगजनी और झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बाद में मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी, जिसने इस प्रकरण में अलग-अलग छह मामले दर्ज किए।
जांच एजेंसी का दावा है कि हिंसा से पहले और उसके दौरान कुछ राजनीतिक व्यक्तियों की कथित भड़काऊ टिप्पणियां कानून-व्यवस्था बिगड़ने की एक बड़ी वजह बनी थीं। इन्हीं बयानों, आपसी संपर्कों और संभावित साजिश के पहलुओं की जांच की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को रिषड़ा स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य जरूरी जानकारियां एकत्र की हैं। हालांकि तलाशी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, हिंसा से पहले और बाद में विभिन्न स्थानों से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य दृश्य सामग्री की जांच की गई है। इन्हीं सबूतों के आधार पर कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच में कुछ ऐसे वीडियो और बयान भी सामने आए हैं, जिनमें कुछ राजनीतिक व्यक्तियों को तनाव बढ़ाने वाले बयान देते हुए देखा गया है। हालांकि इन बयानों की सत्यता और उद्देश्य अभी जांच के दायरे में हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

