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नेहरू की प्रतिमा हटाकर जंगल में फेंकने का आरोप, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोले—‘इतिहास मिटाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’

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नेहरू की प्रतिमा हटाकर जंगल में फेंकने का आरोप, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोले—‘इतिहास मिटाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’


कोलकाता, 30 अगस्त (हि.स.)। दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को कथित तौर पर उखाड़कर जंगल में फेंके जाने की घटना को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने रविवार को घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे केवल एक प्रतिमा को हटाने की घटना मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे देश के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतांत्रिक परंपरा और आधुनिक भारत के निर्माण के इतिहास से जुड़ा सवाल है।

शुभंकर सरकार ने कहा, “पंडित जवाहरलाल नेहरू सिर्फ कांग्रेस के नेता नहीं थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, भारत के पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के निर्माण के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे।” उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की प्रतिमा को अपमानित करने का अधिकार किसी को नहीं है।

कांग्रेस के अनुसार, दुर्गापुर के हर्षवर्धन प्राथमिक विद्यालय के पास एक ध्यान केंद्र के सामने लंबे समय से स्थापित नेहरू की प्रतिमा को क्रेन की मदद से हटाया गया और बाद में उसे पास के जंगल में फेंक दिया गया। घटना के बाद जिला कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि इतिहास को मिटाने या ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अपमान करने का प्रयास किया जाता है, तो कांग्रेस उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएगी। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से प्रतिमा को तत्काल सम्मानपूर्वक उसके पूर्व स्थान पर स्थापित करने तथा घटना में शामिल लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक विचारधारा को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं, भाजपा विधायक चंद्रशेखर बंद्योपाध्याय ने घटना में भाजपा की किसी भी भूमिका से इनकार किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय