रिटायर्ड कर्मचारियों पर रोक से एनबीएसटीसी संकट में, कामकाज ठप होने का खतरा
कूचबिहार,13 मई (हि.स.)। राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति पर हालिया रोक के बाद नार्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनबीएसटीसी) गंभीर संकट में फंस गया है। निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपंकर पिपलाई ने आशंका जताई है कि अगर रिटायर्ड कर्मचारियों को हटाया गया तो दैनिक कामकाज चलाना मुश्किल हो जाएगा।
दीपंकर पिपलाई ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए वे जल्द ही कोलकाता जाकर परिवहन विभाग के मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे। उनके अनुसार, “नए कर्मचारियों की भर्ती किए बिना पुराने अनुभवी कर्मचारियों को हटाया गया तो निगम पूरी तरह चरमरा जाएगा।”
पहले ममता बनर्जी के कार्यकाल में रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखा गया था, क्योंकि नई नियुक्तियां नहीं हो रही थी। फिलहाल निगम में 33 रिटायर्ड कर्मचारी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत है—जैसे डिपो इंचार्ज, ऑपरेशन, अकाउंट्स, लॉ और टेक्निकल विभाग।
स्थिति यह है कि कूचबिहार डिपो से लेकर रायगंज, अलीपुरद्वार और अन्य डिवीजनों में भी प्रमुख जिम्मेदारियां इन्हीं अनुभवी कर्मचारियों के पास है। अगर इन्हें अचानक हटा दिया गया तो प्रशासनिक और तकनीकी काम पूरी तरह प्रभावित हो सकते है।
निगम पहले से ही भारी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जहां सात असिस्टेंट इंजीनियर होने चाहिए, वहां सिर्फ एक है। 27 जूनियर फोरमैन के सभी पद खाली हैं। तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण बाहरी एजेंसियों से काम कराया जा रहा है, लेकिन उनकी निगरानी के लिए भी पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं।
आंकड़ों के अनुसार, निगम में 3,775 स्थायी पदों की जरूरत है, लेकिन 3,464 पद खाली पड़े है। 700 बसों के बेड़े में से चालक और कंडक्टर की कमी के चलते रोज केवल 550–570 बसें ही सड़कों पर उतर पा रही है।
मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि अभी तक नई भर्ती का कोई आदेश नहीं आया है, और अगर आता भी है तो पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। ऐसे में तत्काल समाधान न मिलने पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

