चुनाव 26 : नारायणगढ़ सीट पर कड़ा मुकाबला तय
पाश्चिम मेदिनीपुर, 25 मार्च (हि.स.)। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ही अपने प्रचार अभियान को तेज कर रहे हैं, जबकि अंदरूनी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
टीएमसी द्वारा मौजूदा विधायक सूर्यकांत अट्टा की जगह पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद की सभाधिपति प्रतिभारानी माइती को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले से क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। अट्टा ने 2021 में बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार उनके चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से नजर न आने से पार्टी के भीतर संगठनात्मक एकता को लेकर चिंता जताई जा रही है।
प्रतिभारानी माइती ने पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर समन्वित प्रचार सुनिश्चित किया है। उन्होंने हाल ही में सूर्यकांत अट्टा के घर जाकर उनका समर्थन भी मांगा। माइती के अनुसार, अट्टा ने सहयोग का आश्वासन दिया है।
हालांकि, टिकट न मिलने से अट्टा ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किए गए अपने काम के बावजूद उन्हें मौका नहीं दिया गया। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक छवि का असर चुनाव प्रचार पर पड़ सकता है।
नारायणगढ़ सीट का राजनीतिक इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। सूर्यकांत मिश्रा ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से लगातार पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया और लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखा। 2011 में टीएमसी के सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने सीट बरकरार रखी, लेकिन 2016 में उन्हें टीएमसी उम्मीदवार प्रद्युत घोष से हार का सामना करना पड़ा, जो इस क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
भाजपा ने एक बार फिर रमाप्रसाद गिरि को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि पार्टी के भीतर कुछ असंतोष की खबरें सामने आई हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी उम्मीदवारी पर आपत्ति जताई है और विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
गिरि ने इन मतभेदों को मामूली बताते हुए कहा कि उन्हें जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी के अंदरूनी मतभेद भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।
नारायणगढ़ में भाजपा का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ा है। 2011 में जहां पार्टी को केवल पांच हजार 345 वोट मिले थे, वहीं 2016 में यह संख्या बढ़कर 10 हजार 262 हो गई। 2021 में भाजपा ने बड़ी छलांग लगाते हुए 98 हजार 473 वोट हासिल किए।
वहीं, टीएमसी को एक लाख 894 वोट मिले थे, जबकि माकपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच जनाधार मजबूत करने की कोशिशों के बीच नारायणगढ़ सीट इस बार के चुनाव में बेहद दिलचस्प और करीबी मुकाबले वाली बनती नजर आ रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

