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चोरबागान हादसे से सबक, नदिया में त्योहारों पर भीड़ नियंत्रण के कड़े इंतजाम

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नदिया, 02 नवंबर (हि. स.)। दुर्गापूजा के दौरान चोरबागान में हुई भगदड़ से सबक लेते हुए नदिया जिले में कालीपूजा, छठ पूजा, रास उत्सव और जगद्धात्री पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाएगी। इसके तहत पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने, शोभायात्राओं के मार्ग निर्धारित करने और प्रतिमा विसर्जन के लिए निश्चित समय तय करने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद राज्य की मंत्री मौमिता विश्वास मिश्रा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रमुख पूजा पंडालों का प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम निरीक्षण करेगी। पंडालों की क्षमता का आकलन कर वहां एक समय में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी।

बैठक में विधायक, दोनों संगठनात्मक जिलों के अध्यक्ष, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा अग्निशमन, लोक निर्माण, सिंचाई, बिजली और यातायात विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

मंत्री ने चोरबागान की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत घोषणा के कारण वहां अचानक भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई थी। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सार्वजनिक घोषणाओं और भीड़ की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। भीड़भाड़ वाले पूजा स्थलों पर घोषणा करने वालों को पहले से निर्धारित नोडल अधिकारियों को जानकारी देनी होगी।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पूजा स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पष्ट प्रवेश और निकास मार्ग, पर्याप्त रोशनी, प्राथमिक चिकित्सा तथा अग्निशमन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। पूजा समितियां अपने स्वयंसेवक तैनात करेंगी, जबकि प्रशासन नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पूजा समिति के सदस्यों का त्वरित कार्रवाई दल भी बनाया जाएगा। एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियों के लिए रास्ता बाधामुक्त रखना होगा।

प्रशासन कालीपूजा, रास और जगद्धात्री पूजा की शोभायात्राओं को भी नियंत्रित करेगा। पूजा समितियों को यात्रा का समय, निर्धारित मार्ग और विसर्जन घाट की जानकारी प्रशासन को देनी होगी। अलग-अलग शोभायात्राओं के समय में अंतर रखा जाएगा, ताकि एक ही स्थान पर एक साथ भीड़ एकत्रित न हो।

मंत्री ने कृष्णनगर की प्रसिद्ध बुड़िमा प्रतिमा की विसर्जन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए भी शुरुआत और समाप्ति का निश्चित समय तय किया जाएगा। यह यात्रा कई बार अगले दिन दोपहर तक चलती है। उन्होंने कहा कि प्रभावी भीड़ प्रबंधन के लिए समय सीमा निर्धारित करना आवश्यक है।

मंत्री ने शांतिपुर और नवद्वीप के पारंपरिक रास उत्सव तथा कृष्णनगर की जगद्धात्री पूजा को विरासत का दर्जा दिलाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु की भूमि नदिया का रास उत्सव अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। इसमें देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पारंपरिक आयोजनों में विकृत संस्कृति के प्रवेश पर चिंता जताते हुए उन्होंने रास उत्सव को विरासत उत्सव के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार से आग्रह करने की बात कही।

वहीं, दुर्गापूजा समितियों को मिलने वाली बिजली और अग्निशमन शुल्क की छूट इन उत्सवों को भी देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता