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अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर अधीर रंजन ने कहा :बंगाल को राजनीतिक हिंसामुक्त करने की जरूरत

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अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर अधीर रंजन ने कहा :बंगाल को राजनीतिक हिंसामुक्त करने की जरूरत


बहरमपुर, 31 मई (हि. स.)। सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में हिंसा-मुक्त राजनीतिक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने रविवार को बहरमपुर में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान उक्त बाते कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य में दशकों से राजनीतिक हिंसा होती रही है और अब लोग इस तरह की घटनाएं देखने के अभ्यस्त हो चुके हैं, लेकिन लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

एक संवाददाता सम्मेलन में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी राजनीतिक हिंसा का सामना किया है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में रानीनगर क्षेत्र में उनकी गाड़ी को घेर लिया गया था, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और वाहन में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विधायक को रास्ते में घेरकर हमला किया गया, यहां तक कि नामांकन दाखिल करने तक नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासन ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई और विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग से रोका गया।

अधीर ने कहा कि उनकी एकमात्र मांग है कि पश्चिम बंगाल में ऐसा राजनीतिक वातावरण बने जहां सभी पार्टी बिना भय के राजनीति कर सकें। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी राजनीतिक पार्टियों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित करे।

अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी सांसद पर उसके संसदीय क्षेत्र में हमला होना बहादुरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विफलता का संकेत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस क्षेत्र में नगर निकाय, जिला परिषद, विधायक और सांसद सभी तृणमूल कांग्रेस के हैं, वहां अपने ही सांसद की सुरक्षा के लिए पार्टी का कोई नेता या कार्यकर्ता सामने क्यों नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह सवाल तृणमूल कांग्रेस को स्वयं से पूछना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि चार मई को चुनावी जीत के बाद कई स्थानों पर तृणमूल के कार्यकर्ता जय श्रीराम के नारे लगाते हुए जुलूस निकालते दिखाई दिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि वर्षों तक जिस राजनीतिक संगठन पर गर्व किया गया, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है।

रेलवे द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान पर भी अधीर रंजन चौधरी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे की कार्रवाई से बड़ी संख्या में हॉकर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि किसी भी बेदखली अभियान से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रातों-रात लोगों को हटाना उचित नहीं है और यह गरीबों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

राज्य सरकार की अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए जारी किए गए 12 पृष्ठों के आवेदन फॉर्म पर भी अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार आखिर इन फॉर्मों के माध्यम से क्या जानकारी जुटाना चाहती है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों की पहचान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि लोगों को ही यह साबित करना पड़े कि वे गरीब हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सांसद या जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में आने-जाने और लोगों से मिलने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। यदि कोई सांसद अपने ही संसदीय क्षेत्र में सुरक्षित महसूस नहीं करता, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिन लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रहती है, वही व्यवस्था बाद में कमजोर पड़ जाती है।

उन्होंने अंत में कहा कि पश्चिम बंगाल को राजनीतिक हिंसा की परंपरा से बाहर निकलना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा