मदन मित्रा के खिलाफ जांच में नए खुलासे, रिश्वत लेकर अवैध नियुक्तियां करवाने का आरोप
कोलकाता, 13 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के चर्चित नगर निकाय भर्ती घोटाले की जांच में तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्र का नाम प्रमुखता से सामने आया है। शनिवार को उनसे जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, मदन मित्र पर कामरहाटी समेत कई नगर निकायों में कथित तौर पर अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से नौकरी दिलाने और इसके बदले नकद राशि तथा सोने के रूप में रिश्वत लेने के आरोप हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नगर निकायों में 125 से अधिक कथित अवैध नियुक्तियों में मदन मित्र की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि नौकरी दिलाने के बदले उम्मीदवारों से धन, सोना और कीमती सामान वसूले जाते थे। हालांकि जांचकर्ताओं का मानना है कि कथित रिश्वत सीधे मदन मित्र तक नहीं पहुंचती थी, बल्कि बिचौलियों के माध्यम से उनके पास पहुंचाई जाती थी। इसी कारण कथित मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
नगर निकाय भर्ती अनियमितता का मामला उस समय सामने आया था जब विद्यालय भर्ती घोटाले की जांच के दौरान कारोबारी अयन शील के ठिकानों से बड़ी संख्या में दस्तावेज, उत्तर पुस्तिकाएं और ओएमआर शीट बरामद हुई थीं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन दस्तावेजों से नगर निकायों में भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नौकरी बेचने के संकेत मिले थे।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर धन के बदले नियुक्तियां दी गई थीं। वित्तीय लेन-देन, कथित बिचौलियों के नेटवर्क और भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

