पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ एमपीओ कानून की दो धाराएं जोड़ने की अपील, फर्जी खातों में भारी रकम भेजने का आरोप
कोलकाता, 03 नवंबर (हि. स.)। राज्य के पूर्व सूचना एवं संस्कृति मंत्री इंद्रनील सेन पर पद पर रहते हुए सत्ता का दुरुपयोग कर भारी मात्रा में अवैध संपत्ति और धन अर्जित करने का गंभीर आरोप लगा है। जांचकर्ताओं ने यह चौंकाने वाला दावा किया है कि उन्होंने न केवल अवैध धन कमाया, बल्कि उस बेहिसाब पैसे को छिपाने के लिए कई फर्जी और बेनामी बैंक खातों में भी स्थानांतरित किया है। कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग के सूत्रों के हवाले से यह अहम जानकारी सामने आई है।
विशाल अवैध संपत्ति और धन की जांच के सिलसिले में कोलकाता पुलिस ने पूर्व मंत्री के खिलाफ 'पश्चिम बंगाल राज्य जनक्षेत्र एवं अपराध दमन कानून' (एमपीओ) की धारा दो और नौ जोड़ने की अनुमति मांगने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में पेश की गई पुलिस की याचिका में कहा गया है कि संशोधित एमपीओ कानून की धारा दो के तहत इस प्रकार के अवैध धन और संपत्ति अर्जन को अपराध की श्रेणी में रखने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, इसी कानून की धारा नौ में ऐसे गंभीर आर्थिक अपराधों के लिए कठोर दंड का भी उल्लेख है। सरकारी वकील ने न्यायाधीश के समक्ष दलील दी है कि अपराध के पैमाने और उसकी गंभीरता को देखते हुए इस मामले में इन दो नई धाराओं को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान पूर्व मंत्री के विभिन्न बैंक खातों और संपत्तियों का जब हिसाब-किताब मिलाया गया, तो वित्तीय अनियमितताओं का एक बहुत बड़ा जाल सामने आया। अब कोलकाता पुलिस पता लगाना चाहती है कि यह अवैध पैसा किन रास्तों से होकर गुजरा, इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं, और क्या इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय या राज्य स्तर का कोई बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी गिरोह काम कर रहा है। इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस इंद्रनील सेन को हिरासत में लेकर उनसे विस्तृत पूछताछ करना चाहती है।
वर्तमान में बैंकशाल अदालत में इंद्रनील सेन के खिलाफ दर्ज इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया चल रही है। पूर्व मंत्री के खिलाफ एमपीओ कानून की इन नई और कठोर धाराओं को जोड़ने की पुलिस की अपील पर अदालत क्या फैसला सुनाती है, इस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।
इस संबंध में नाम न छापने की शर्त पर कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यदि अदालत इन धाराओं को लागू करने का निर्देश देती है, तो मामले की जांच करना कहीं अधिक सुगम हो जाएगा और पूरी जांच प्रक्रिया को और भी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा

