गड़बेता में फिर राजनीतिक तनाव की आशंका, तपन घोष को लेकर भाजपा और माकपा के बीच तनातनी
खड़गपुर, 3 नवंबर (हि.स.)। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के गड़बेता में एक बार फिर राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। माकपा नेता तपन घोष को लेकर भाजपा और माकपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। भाजपा विधायक प्रदीप लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि तपन घोष अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को साथ लेकर कथित तौर पर हार्माद वाहिनी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रदीप लोढ़ा का दावा है कि लोकतांत्रिक तरीके से हार स्वीकार नहीं कर पाने के कारण तपन घोष गड़बेता पर कब्जा करने की बातें कर रहे हैं। भाजपा के अनुसार, अल्पसंख्यक बहुल गांवों में संगठन बनाने की गतिविधियों की जानकारी खुफिया विभाग को भी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी तपन घोष को लेकर कड़ा बयान दिया है।
प्रदीप लोढ़ा के मुताबिक, वाममोर्चा शासन के दौरान मारे गए 25 भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों ने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि उन घटनाओं के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले तपन घोष, सुकुर अली और सुशांत घोष अब तक खुलेआम क्यों घूम रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से कहा है कि तपन घोष को जेल में होना चाहिए।
गड़बेता में भाजपा का प्रभाव वर्ष 1989 से बढ़ना शुरू हुआ था। 1998 में तत्कालीन जिला अध्यक्ष रमाप्रसाद तिवारी के नेतृत्व में पार्टी ने गड़बेता, सानमुड़ा, धादिका और श्यामनगर की चार ग्राम पंचायतों पर जीत दर्ज की थी। बाद में रमाप्रसाद तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका कहना है कि माकपा के अत्याचार के विरोध में भाजपा ने ही यहां संघर्ष शुरू किया था।
तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन में माकपा की राजनीतिक गतिविधियां भी सीमित हो गई थीं। पार्टी का अस्तित्व मुख्य रूप से गड़बेता के आंचलिक कार्यालय तक रह गया था और कई नेता दूसरे शहरों में चले गए थे। अब सत्ता परिवर्तन के बाद माकपा फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने भी आरोप लगाया है कि कंकाल कांड से जुड़े लोग इसका लाभ उठाना चाहते हैं।
गड़बेता छोटा आंगरिया नरसंहार का भी गवाह रहा है। उस घटना में गोलीबारी के बाद घरों में आग लगाकर लोगों की हत्या करने का आरोप लगा था। क्षेत्र में देसी तोप वॉक्सल के इस्तेमाल, घर जलाने, दुष्कर्म, हत्या और लूटपाट की घटनाएं भी हुई थीं। स्थानीय लोग इन घटनाओं के साथ तपन घोष का नाम जोड़ते रहे हैं। उस समय इलाके में तपन घोष और सुकुर अली का जबर्दस्त दबदबा हुआ करता था।
भाजपा का कहना है कि वह क्षेत्र में हिंसा के पुराने दिनों की वापसी नहीं चाहती। वहीं, माकपा ने आरोपों को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। पार्टी का दावा है कि तपन घोष के नेतृत्व में लोग फिर माकपा की ओर लौट रहे हैं, जिससे भाजपा घबराई हुई है। माकपा के पश्चिम मेदिनीपुर जिला सचिव विजय पाल ने कहा कि भाजपा लाल झंडे से डर रही है। मुख्यमंत्री को डराने-धमकाने के बजाय अपने वादे के अनुसार विकास कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की चेतावनियों से माकपा की राजनीतिक गतिविधियां नहीं रुकेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

