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धर्मतला के वाई चैनल पर ममता का धरना, पुलिस ने तय किया तीन घंटे का समय

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धर्मतला के वाई चैनल पर ममता का धरना, पुलिस ने तय किया तीन घंटे का समय


कोलकाता, 02 जून (हि. स.)। मतदान के बाद कथित राजनीतिक हिंसा के विरोध में तृणमूल कांग्रेस की ओर से मंगलवार को धर्मतला स्थित वाई चैनल पर धरना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पुलिस ने दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक कार्यक्रम की अनुमति दी है। इसके मद्देनजर तृणमूल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। महिला पुलिसकर्मियों की भी उल्लेखनीय मौजूदगी देखी जा रही है।

मूल रूप से तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने रानी रासमणि एवेन्यू में धरना देने का आह्वान किया था। हालांकि वहां पहले से निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए पुलिस ने अनुमति नहीं दी। सोमवार को पुलिस ने सुझाव दिया कि यदि तृणमूल चाहे तो वाई चैनल में कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकती है। इसके बाद वाई चैनल में धरना आयोजित करने की अनुमति दी गई।

अनुमति प्रक्रिया को लेकर तृणमूल नेताओं ने सवाल उठाए थे। पार्टी विधायक कुणाल घोष ने पूछा था कि पहले से प्रस्तावित कार्यक्रम के बावजूद नए सिरे से आवेदन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि देर रात ईमेल भेजकर अनुमति की नई शर्तें बताई गईं, जो विपक्षी आवाज को दबाने का प्रयास है।

मंगलवार दोपहर से ही तृणमूल के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता वाई चैनल पहुंचने लगे। पूर्व मंत्री शोभनदेव चटर्जी, नयना बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई नेता कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। वरिष्ठ नेता अशोक देव भी धरना स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी वहां एकत्र हुए तथा ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाए।

तृणमूल का आरोप है कि नई भाजपा सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके कार्यक्रमों में बाधा डाल रही है। दूसरी ओर राजनीतिक पर्यवेक्षक इस घटनाक्रम की तुलना उस दौर से कर रहे हैं जब राज्य में तृणमूल सरकार के समय भाजपा को कई कार्यक्रमों के लिए पुलिस अनुमति प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और तत्कालीन विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को कई बार अदालत की शरण लेनी पड़ती थी।

ममता बनर्जी के इस धरना कार्यक्रम को विधानसभा चुनाव के बाद उनके पहले बड़े राजनीतिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर राज्य की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर