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तृणमूल में असंतोष के बीच ममता बनर्जी का भाजपा पर हमला, बोलीं- विधायकों को डराकर तोड़ने की हो रही कोशिश

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तृणमूल में असंतोष के बीच ममता बनर्जी का भाजपा पर हमला, बोलीं- विधायकों को डराकर तोड़ने की हो रही कोशिश


कोलकाता, 01 जून (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस में हाल के दिनों में बढ़े असंतोष, विधायकों की नाराजगी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बीच पार्टी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा भय और धनबल का इस्तेमाल कर तृणमूल के विधायक एवं सांसदों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है।

सोमवार को फेसबुक लाइव के माध्यम से कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों के जरिए तृणमूल के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विधायकों ने उनसे शिकायत की है कि यदि वे पार्टी की बैठकों में शामिल होते हैं तो उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम या मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

ममता ने कहा, “चार विधायकों ने मुझसे शिकायत की है कि पुलिस उन्हें कह रही है कि यदि वे बैठक में जाएंगे तो उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे। यह लोकतंत्र का कौन सा उदाहरण है? राज्य में अत्याचार की सभी सीमाएं पार हो चुकी हैं।”

उल्लेखनीय है कि शनिवार को कालीघाट में आयोजित तृणमूल की बैठक में पार्टी के 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायक अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस पहले तृणमूल नेताओं और विधायकों को भाजपा नेताओं से संपर्क करने के लिए प्रेरित करती है और उसके बाद भाजपा की ओर से उनसे संपर्क किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल को कमजोर करने की यह एक सुनियोजित कोशिश है।

इसी बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तृणमूल ने सोमवार को दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा, को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। इस घटनाक्रम के बीच ममता ने नाम लिए बिना ऋतब्रत पर निशाना साधते हुए उन्हें सिद्धांतहीन व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण अवसर दिए, लेकिन उन्होंने धोखा दिया।

ममता ने यह भी कहा कि कुछ नेता राजनीतिक परिस्थितियां बदलते ही अपना रुख बदल लेते हैं, जबकि पार्टी की वास्तविक ताकत उसके कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को तोड़ना आसान नहीं है और यदि कुछ नेता पार्टी छोड़ भी दें तो संगठन कार्यकर्ताओं के बल पर फिर से मजबूती से खड़ा होगा।

उन्होंने कहा कि नेता डर सकते हैं, लेकिन कार्यकर्ता नहीं डरते। जिन्होंने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता, सत्ता का लाभ उठाया, वही लोग अब दूसरी पार्टियों से समझौता कर रहे हैं। हजारों कार्यकर्ता जेल गए, संघर्ष किया। क्या उनके बारे में कोई सोचता है?

अपने संबोधन में ममता ने हाल में अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित दुर्व्यवहार की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के एक सदस्य पर हमला किया गया, लेकिन उन्होंने दबाव के आगे झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगी और तृणमूल कांग्रेस को किसी भी राजनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करेंगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर