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ममता बनर्जी का दावा - उनकी किताबों की रॉयल्टी इस वर्ष नहीं मिली

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ममता बनर्जी का दावा - उनकी किताबों की रॉयल्टी इस वर्ष नहीं मिली


कोलकाता, 04 अगस्त (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए राजनीतिक प्रताड़ना, पुलिस के दुरुपयोग और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर जनआंदोलन खड़ा करने की अपील की।

वीडियो संदेश के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हजारों मामले दर्ज किए गए हैं तथा पंचायतों, नगरपालिकाओं और जिला परिषदों पर कब्जा किया गया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी लोग एकजुट होकर जनआंदोलन करें। उन्होंने दावा किया कि उनकी पुस्तकों की रॉयल्टी का भुगतान रोक दिया गया है और पार्टी के बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कई जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम बदले जा रहे हैं।

ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सोनार बंगाल को जेल में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य की शांति, सौहार्द और सांस्कृतिक पहचान पर हमला किया जा रहा है।

उन्होंने भाजपा पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्वों का अपमान करने का भी आरोप लगाया। ममता ने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए इन महापुरुषों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं, जो शर्मनाक है।

युवाओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान और विरासत को बचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने भाजपा से यह भी पूछा कि सत्ता में आने से पहले किए गए वादों का क्या हुआ।

पुलिस को लेकर ममता ने कहा कि वह पुलिस बल का सम्मान करती हैं, लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को दूसरी पार्टी में शामिल होने या जेल जाने की धमकी दी जा रही है।

तृणमूल प्रमुख ने गंगाजलघाटी में आशा कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। ममता ने कहा कि उनकी पार्टी उस आशा कार्यकर्ता के परिवार से मुलाकात करेगी, जिसकी मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कई स्थानों पर जाने से भी रोका जा रहा है।

अपने संबोधन में उन्होंने महिलाओं, छात्रों और युवाओं से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है, पीड़ित परिवारों पर दबाव बनाया जा रहा है और नीट आंदोलन से जुड़े छात्रों को राष्ट्रविरोधी बताया जा रहा है।

अंत में ममता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज के जागरूक लोगों को अब चुप नहीं रहना चाहिए और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर