माईथन में ग्रामीणों ने 12 सौ करोड़ की सौर परियोजना का जताया विरोध
पश्चिम बर्दवान, 21 अगस्त (हि. स.)। माईथन बांध पर प्रस्तावित 234 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर स्थानीय विस्थापित परिवारों और डीवीसी के बीच विवाद गहरा गया है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1200 करोड़ रुपये बताई गई है।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को रामचंद्रपुर कम्युनिटी हॉल में डीवीसी, प्रशासन और दामोदर वैली विस्थापित संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई। बैठक में डोमदहा, कालीपाथर, सिधाबाड़ी, लाधना, वृंदावनी, बाथानबाड़ी समेत करीब 12 गांवों के विस्थापित परिवारों की मांगों पर चर्चा हुई।
विस्थापित परिवारों का कहना है कि माईथन बांध के निर्माण के दौरान उनकी जमीन और घर जलमग्न हो गए थे। उनका आरोप है कि उस समय नौकरी, स्कूल, पेयजल और मुफ्त बिजली जैसी सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दशकों बाद भी उनकी कई मांगें पूरी नहीं हुईं।
ग्रामीणों ने मांग की कि बांध के आसपास के गांवों को मुफ्त बिजली दी जाए और परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक सोलर परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
डीवीसी के डीजीएम प्रशासन सुखमय नायक ने कहा कि ग्रामीणों की सभी मांगें लिखित रूप में ली गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुफ्त बिजली देना डीवीसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है और इसके लिए सरकार की नीति एवं निर्देश जरूरी होंगे।
हालांकि, डीवीसी ने सीएसआर फंड से गांवों में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और कम्युनिटी हॉल जैसी सुविधाओं के विकास का आश्वासन दिया। मोबाइल हेल्थ वैन की संख्या बढ़ाने और लेफ्ट बैंक स्कूल के जीर्णोद्धार की जानकारी भी दी गई।
रोजगार के मुद्दे पर डीवीसी ने कहा कि स्थायी नौकरी देना संभव नहीं होगा। हालांकि, परियोजना की ठेका एजेंसी एल एंड टी पावर के माध्यम से आवश्यक अकुशल श्रमिकों की भर्ती स्थानीय गांवों से करने तथा आइटीआई, डिप्लोमा और सोलर क्षेत्र में योग्यता रखने वाले युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई।बैठक के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। डीवीसी अधिकारियों ने भी माना कि बैठक सफल नहीं हुई और आवश्यकता पड़ने पर फिर से वार्ता की जाएगी।
फिलहाल माईथन की 234 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना का काम अटक गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

