विधानसभा में ममता खेमे के धरने में पहुंचे मदन मित्रा, बढ़ी अटकलें
कोलकाता, 17 जुलाई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति निष्ठावान विधायकों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शुक्रवार को वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा की अचानक उपस्थिति ने सभी को चौंका दिया। यह घटनाक्रम ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे में उनके शामिल होने के मात्र दो दिन बाद सामने आया है, जिससे पार्टी के भीतर जारी राजनीतिक संकट और आंतरिक खींचतान की जटिलता एक बार फिर उजागर हुई है।
कामरहटी के विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के प्रति अपनी निष्ठा की घोषणा की थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ी है। शुक्रवार को वह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन तथा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कालीघाट' खेमे द्वारा आयोजित धरने में शामिल हुए।
धरनास्थल पर उनकी उपस्थिति से अनेक विधायक आश्चर्यचकित रह गए। इस दौरान वरिष्ठ तृणमूल नेता कुणाल घोष के साथ उनकी हल्की-फुल्की बातचीत भी देखने को मिली।
कुणाल घोष ने मुस्कुराकर मदन मित्रा का स्वागत करते हुए परिहासपूर्ण अंदाज में कहा कि यद्यपि अनुभवी विधायक शारीरिक रूप से दूसरे खेमे में चले गए हैं, किंतु उनका दिल अभी भी यहीं है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मदन मित्रा की पत्नी और पुत्रों को नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख करते हुए कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक को कुछ दिनों तक अपने मन की बात कहने दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी खेमे के पास अब प्रतिद्वंद्वी धड़े के भीतर अपना एक व्यक्ति मौजूद है।बातचीत के दौरान मदन मित्रा मुस्कुराते हुए दिखाई दिए।
धरने में अपनी उपस्थिति को स्पष्ट करते हुए मदन मित्रा ने कहा कि वह ऋतव्रत बनर्जी के कक्ष से बाहर निकलने के बाद केवल शिष्टाचारवश वहां कुछ समय के लिए रुके थे और इसका उनकी राजनीतिक स्थिति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरा रुख अपरिवर्तित है।
अपने परिवार के सदस्यों को ईडी द्वारा भेजे गए समन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मदन मित्रा ने कहा कि उनका परिवार जांच में पूरा सहयोग करेगा।
उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी और पुत्रों को जांच एजेंसी ने तलब किया है। वे उपस्थित होंगे। उन्हें पहले भी बुलाया जा चुका है। यदि मैंने वास्तव में कुछ गलत किया है तो उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल के कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में अगले सप्ताह पूछताछ के लिए मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो पुत्रों को तलब किया है।
मदन मित्रा की यह अप्रत्याशित उपस्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब वह दो दिन पूर्व ही ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे में शामिल होकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को बड़ा झटका दे चुके हैं।
उन्होंने यह दोहराया कि वह अब भी तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं और उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। हालांकि बुधवार को उन्होंने घोषणा की थी कि वह ममता बनर्जी-तृणमूल कांग्रेस खेमे के अंतर्गत कार्यरत सभी संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं, जिनमें विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक का पद भी शामिल है।
ममता बनर्जी के सबसे पुराने राजनीतिक सहयोगियों तथा तृणमूल कांग्रेस के स्थापना काल के नेताओं में शामिल मदन मित्रा का यह कदम कई प्रमुख नेताओं के पार्टी से अलग होने के बाद सामने आया है, जिससे ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी धड़ा और मजबूत हुआ है।
विधानसभा के भीतर शुक्रवार को देखने को मिले दृश्य, जिनमें मदन मित्रा ने निष्ठा परिवर्तन के बावजूद ममता बनर्जी खेमे के नेताओं के साथ खुलकर बातचीत की, इस राजनीतिक विभाजन की असामान्य प्रकृति को रेखांकित करते हैं। दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट अब भी तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले कार्य कर रहे हैं और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर खुली राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में लगे हुए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

