विधानसभा में बोलने से रोकने के आरोप पर कुणाल घोष को हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज
कोलकाता, 07 अगस्त (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बोलने का अवसर नहीं दिए जाने के आरोप को लेकर दायर तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष की याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य नहीं है और विधायक अपनी शिकायत विधानसभा के भीतर ही उठाएं।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस याचिका की ग्राह्यता नहीं है और इसे खारिज कर दिया।
विधायक कुणाल घोष का आरोप था कि विधानसभा की महत्वपूर्ण चर्चाओं में उन्हें सुनियोजित और साजिशन बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका दायर करने से पहले कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि विरोध करने पर उन्हें मार्शलों के जरिए सदन से बाहर कराया जाता है और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाया जाता है। इसी कारण उन्होंने न्याय की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
गौरतलब है कि हाल ही में विधानसभा के दौरान विपक्ष के मुख्य सचेतक आखरुज्जमान को बोलने से रोकने के आरोप में कुणाल घोष को एक दिन के लिए निलंबित भी किया गया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने विधानसभा की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि विधायक को सदन के संचालन को लेकर कोई शिकायत है, तो उसे विधानसभा के भीतर उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाया जाना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

